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अंतरिक्ष विज्ञान में नया इतिहास: इसरो ने बेंगलुरु से अत्याधुनिक मौसम उपग्रह 'मेघ-दृष्टि' का सफल प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने आज एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अत्याधुनिक मौसम निगरानी उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:11
अंतरिक्ष विज्ञान में नया इतिहास: इसरो ने बेंगलुरु से अत्याधुनिक मौसम उपग्रह 'मेघ-दृष्टि' का सफल प्रक्षेपण किया
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज सुबह बेंगलुरु स्थित अपने मुख्य अनुसंधान केंद्र से एक और नया मील का पत्थर पार करते हुए अगली पीढ़ी के मौसम निगरानी उपग्रह 'मेघ-दृष्टि' को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया है। इस उन्नत उपग्रह का मुख्य उद्देश्य दक्षिण एशियाई क्षेत्र में मानसून की गतिविधियों, बादलों के निर्माण और चक्रवातों की दिशा का अत्यंत सटीक और वास्तविक समय पर पूर्वानुमान लगाना है, जिससे आपदा प्रबंधन में अभूतपूर्व सहायता मिलेगी। प्रक्षेपण यान ने अपनी उड़ान के ठीक सत्रह मिनट बाद उपग्रह को पृथ्वी की भू-समकालिक कक्षा में पूरी तरह सुरक्षित रूप से स्थापित कर दिया, जिसके बाद अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस बड़ी सफलता का जश्न मनाया गया।

उपग्रह की तकनीकी विशेषताएं और क्षमताएं

इस अत्याधुनिक उपग्रह में देश में ही विकसित किए गए अत्यंत संवेदनशील ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर लगाए गए हैं जो रात के अंधेरे में भी बादलों की मोटाई और वर्षा की मात्रा का सटीक आकलन करने में सक्षम हैं। इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, 'मेघ-दृष्टि' पारंपरिक उपग्रहों की तुलना में तीन गुना अधिक स्पष्ट और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली छवियां प्रदान करेगा, जिससे मौसम वैज्ञानिकों को किसी भी चक्रवात या अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के बारे में कई घंटे पहले ही चेतावनी जारी करने में मदद मिलेगी। इस पूरे मिशन में स्वदेशी तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया है, जो प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को और अधिक सुदृढ़ करता है तथा वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की स्थिति को अत्यंत मजबूत बनाता है।

वैज्ञानिक समुदाय की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजनाएं

देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थानों ने इसरो के इस सफल प्रक्षेपण की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और इसे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया है। इस मिशन की सफलता के बाद अब इसरो की निगाहें आगामी महीनों में मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम 'गगनयान' के मानवरहित परीक्षणों और चंद्रमा से जुड़े आगामी वैज्ञानिक अभियानों पर टिकी हुई हैं, जिनकी तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। उपग्रह के सभी सोलर पैनल और संचार एंटेना सुचारू रूप से काम करने लगे हैं और बेंगलुरु स्थित मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स (MOX) ने उपग्रह से पहला डेटा सिग्नल भी सफलतापूर्वक प्राप्त करना शुरू कर दिया है।
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