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अंतरिक्ष विज्ञान में नया मुकाम: भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सौर कोरोना के अध्ययन के लिए विशेष वेधशाला स्थापित की

लद्दाख की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और प्रमुख खगोल भौतिकी संस्थानों ने सौर वायुमंडल के अध्ययन के लिए एक अत्याधुनिक ऑप्टिकल वेधशाला स्थापित की है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 17:46
अंतरिक्ष विज्ञान में नया मुकाम: भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सौर कोरोना के अध्ययन के लिए विशेष वेधशाला स्थापित की
अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत ने एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में दुनिया की सबसे ऊंची खगोलीय सौर वेधशालाओं में से एक का संचालन शुरू कर दिया है। समुद्र तल से लगभग पंद्रह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस विशेष स्टेशन को मुख्य रूप से सूर्य के बाहरी आवरण यानी कोरोना और सौर तूफानों के सटीक अध्ययन के लिए डिजाइन किया गया है। इस ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होने और बादलों की अनुपस्थिति के कारण खगोलविदों को सूर्य की क्रिस्टल-क्लियर छवियां प्राप्त हो रही हैं, जो अब तक मैदानी इलाकों से संभव नहीं हो पा रही थीं।

अत्याधुनिक ऑप्टिकल उपकरण

इस वेधशाला में लगाए गए विशेष टेलीस्कोप और स्पेक्ट्रोपोलिमीटर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार किए गए हैं। इन उपकरणों की मदद से वैज्ञानिक सौर हवाओं के उत्पन्न होने के कारणों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर उनके पड़ने वाले प्रभावों का वास्तविक समय में विश्लेषण कर रहे हैं। प्रधान वैज्ञानिक ने बताया कि यह प्रणाली अंतरिक्ष के मौसम में होने वाले अचानक बदलावों की सटीक भविष्यवाणी करने में मददगार साबित होगी, जिससे हमारे संचार उपग्रहों और पावर ग्रिड प्रणालियों को किसी भी संभावित सौर विकिरण क्षति से समय रहते सुरक्षित बचाया जा सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग

इस अत्याधुनिक सुविधा के शुरू होने के बाद दुनिया भर के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने भारत के साथ शोध पत्र साझा करने और संयुक्त प्रयोग करने में गहरी रुचि दिखाई है। आने वाले महीनों में इस केंद्र को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और नासा के विभिन्न सौर अभियानों के साथ भी जोड़ा जाएगा। यह वेधशाला न केवल भारत को सौर भौतिकी अनुसंधान के वैश्विक मानचित्र के केंद्र में स्थापित करती है बल्कि देश के युवा अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और शोध छात्रों के लिए अनुसंधान के नए द्वार भी खोलती है।
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