भारत को वैश्विक दूरसंचार तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार और प्रमुख प्रौद्योगिकी संस्थानों ने 'भारत 6G मिशन' के तहत प्रायोगिक परीक्षण शुरू कर दिए हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) ने आईआईटी मद्रास और आईआईटी दिल्ली के सहयोग से बने 6G टेस्टबेड पर उच्च-आवृत्ति (Terahertz) स्पेक्ट्रम का सफल परीक्षण किया। अधिकारियों का दावा है कि 6G नेटवर्क 5G की तुलना में 100 गुना अधिक गति और शून्य-लेटेंसी (Zero Latency) प्रदान करने में सक्षम होगा, जिससे डिजिटल कनेक्टिविटी का नया युग शुरू होगा।
इस परियोजना का मुख्य ध्यान होलोग्राफिक संचार, रोबोटिक्स सर्जरी, स्मार्ट सिटी ऑटोमेशन और उन्नत इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर केंद्रित है। 6G तकनीक के माध्यम से भविष्य में रियल-टाइम 3D वीडियो कॉलिंग और स्वायत्त वाहनों (Self-Driving Vehicles) का सुचारू संचालन संभव हो सकेगा। सरकार ने 2030 तक देश के प्रमुख शहरों में 6G सेवाओं को व्यावसायिक रूप से रोलआउट करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है और इसके लिए घरेलू पेटेंट फाइलिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दूरसंचार विशेषज्ञों ने इस पहल को 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है। 5G के तेजी से विस्तार के बाद 6G के शुरुआती चरण में ही अनुसंधान शुरू करने से भारत को वैश्विक पेटेंट और मानकों के निर्धारण में अग्रणी भूमिका मिलेगी। इससे न केवल विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश के विशाल आईटी और टेलीकॉम उद्योग के लिए नए व्यापारिक अवसर भी पैदा होंगे।