चीन की अग्रणी रोबोटिक्स कंपनी 'यूनिट्री रोबोटिक्स' (Unitree Robotics) के संस्थापक और सीईओ वांग शिंगक्सिंग ने मानवाकार (ह्यूमनॉइड) रोबोट उद्योग को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनका मानना है कि आने वाले 3 से 5 वर्षों में यह तकनीक प्रयोगशालाओं से निकलकर सीधे हमारी दैनिक जिंदगी और फैक्ट्रियों का अहम हिस्सा बन जाएगी। यह बदलाव ठीक वैसा ही होगा जैसा दो दशक पहले स्मार्टफोन क्रांति के दौरान देखा गया था।
मैन्युफैक्चरिंग से घरेलू कामों तक: कैसे बदलेगी दुनिया?
ह्यूमनॉइड रोबोट्स केवल टेक प्रदर्शन की वस्तु नहीं रहेंगे, बल्कि वे बड़े पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए तैयार किए जा रहे हैं। यूनिट्री के अनुसार, शुरुआती चरण में इन रोबोट्स को भारी औद्योगिक कामों, खतरनाक वातावरण और ऑटोमोबाइल असेंबली लाइनों में तैनात किया जाएगा। इसके बाद, जैसे-जैसे इनकी लागत कम होगी और एआई (AI) क्षमताएं बेहतर होंगी, ये रोबोट घरेलू देखभाल, बुजुर्गों की सहायता और सेवा क्षेत्र (Service Sector) में अपनी जगह बनाएंगे।
लागत में भारी गिरावट: उत्पादन की गति बढ़ने से रोबोट्स की कीमतें इतनी कम हो जाएंगी कि मध्यम आकार की कंपनियां भी इन्हें अपना सकेंगी।
मल्टी-टास्किंग एआई: एम्बॉडेड एआई (Embodied AI) की मदद से ये रोबोट बिना किसी इंसान के निर्देश के नई परिस्थितियां देखकर खुद फैसले ले सकेंगे।
श्रम संकट का हल: घटती कार्यबल आबादी वाले देशों में यह तकनीक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए जीवनरक्षक साबित होगी।
ग्लोबल रोबोटिक्स रेस और चीन की बढ़त
इस समय वैश्विक स्तर पर मानवाकार रोबोट्स को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा छिड़ी हुई है। एक तरफ जहां अमेरिका की टेस्ला (Optimus) और फिगर एआई (Figure AI) जैसे दिग्गज मैदान में हैं, वहीं चीन सरकार और वहां की स्थानीय टेक कंपनियों ने मिलकर इस उद्योग में अभूतपूर्व निवेश किया है।
यूनिट्री के प्रमुख का कहना है कि चीन के पास एक मजबूत सप्लाई चेन, सस्ता विनिर्माण और एआई तकनीक का तेजी से अपनाने का माहौल मौजूद है, जो उसे इस वैश्विक रेस में सबसे आगे रखता है। यूनिट्री के 'H1' और 'G1' जैसे रोबोट्स ने पहले ही अपनी संतुलन क्षमता, गतिशीलता और कम लागत के कारण वैश्विक ध्यान खींचा है। यह उद्योग अब सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं है कि रोबोट क्या कर सकते हैं, बल्कि इस पर है कि वे कितनी जल्दी और सस्ते में हर इंसान तक पहुंच सकते हैं।