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हार्ट रेट तकनीक: कलाई पर बंधी घड़ी कैसे गिनती है आपकी धड़कन, जानें इसके पीछे का विज्ञान

आज के समय में स्मार्टवॉच हमारी जीवनशैली का एक अहम हिस्सा बन चुकी है, जो हमारी फिटनेस और सेहत पर बारीकी से नजर रखती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कलाई पर बंधी यह छोटी सी घड़ी हमारे दिल की धड़कनों को कैसे सटीक तरीके से माप लेती है?

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Kantap News डेस्क
12 अग 2026, 13:41
हार्ट रेट तकनीक: कलाई पर बंधी घड़ी कैसे गिनती है आपकी धड़कन, जानें इसके पीछे का विज्ञान
स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर्स का उपयोग आज बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। लोग अपने दैनिक स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधियों की निगरानी के लिए इन गैजेट्स पर पूरी तरह निर्भर हैं। इन सभी फीचर्स में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला फीचर हार्ट रेट मॉनिटरिंग है, जो हर सेकंड हमारी नब्ज टटोलता रहता है।

कैसे काम करता है हार्ट रेट सेंसर

इन घड़ियों के पिछले हिस्से में एक विशेष तकनीक का उपयोग किया जाता है जिसे फोटोप्लेथिसमोग्राफी (PPG) कहा जाता है। इसमें एलईडी लाइट और सेंसिटिव फोटोडायोड लगे होते हैं। जब घड़ी को कलाई पर बांधा जाता है, तो ये लाइटें त्वचा के भीतर रक्त वाहिकाओं पर पड़ती हैं और खून के बहाव के आधार पर दिल की धड़कन की गणना करती हैं। दिल के धड़कने पर रक्त का प्रवाह बदलता है, जिससे परावर्तित होने वाली रोशनी की मात्रा में भी बदलाव आता है। सेंसर इस बदलाव को तुरंत भांप लेता है और डिजिटल डेटा में बदलकर स्क्रीन पर पल्स रेट के रूप में प्रदर्शित कर देता है। यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि हमें वास्तविक समय का डेटा मिल जाता है।
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