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इमोशनल सपोर्ट: जेन-जी युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से कर रहे व्यक्तिगत चर्चा, 18 देशों के नए सर्वे में खुलासा
हाल ही में सामने आए एक वैश्विक सर्वे के अनुसार, जेन-जी पीढ़ी के युवा अपनी निजी और भावनात्मक समस्याओं के समाधान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं।
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Ankit Yadav
09 सित 2026, 13:02
आज के दौर में तकनीक हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसका उपयोग अब केवल पेशेवर कार्यों तक सीमित नहीं रहा है। हाल ही में कुल 18 देशों में किए गए एक विस्तृत सर्वे से यह चौंकाने वाला और नया ट्रेंड सामने आया है कि युवा पीढ़ी, जिसे हम जेन-जी के नाम से जानते हैं, अपनी निजी और आंतरिक भावनाओं को साझा करने के लिए इंसानों के बजाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सहारा ले रही है। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि आधुनिक समाज में तकनीक किस प्रकार मानवीय संबंधों और संवाद के तरीकों को गहराई से प्रभावित कर रही है।
बदलती जीवनशैली और एआई का बढ़ता दायरा
डिजिटल युग में पले-बढ़े इन युवाओं के लिए एआई आधारित चैटबॉट्स और वर्चुअल असिस्टेंट केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद दोस्त की तरह उभर रहे हैं। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा अपने दैनिक जीवन के तनाव, अकेलेपन और व्यक्तिगत उलझनों को बेझिझक इन डिजिटल माध्यमों के सामने रख रहे हैं। पारंपरिक रूप से जहां लोग अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों से सलाह लेते थे, वहीं अब कई युवा बिना किसी डर या झिझक के अपनी बातें एआई टूल्स के साथ साझा करना पसंद कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण यह है कि डिजिटल माध्यम बिना किसी पूर्वग्रह या आलोचना के उनकी बातें सुनते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का ट्रेंड समाज और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नए बहस को जन्म दे रहा है। हालांकि यह तकनीक युवाओं को तुरंत मानसिक संबल प्रदान करती है और उन्हें अपनी बात कहने का एक सुरक्षित मंच देती है, लेकिन इसके दीर्घकालिक सामाजिक परिणाम भी हो सकते हैं। अत्यधिक तकनीक पर निर्भरता से वास्तविक जीवन में संवाद कौशल और मानवीय संवेदनाओं पर असर पड़ सकता है। लखनऊ और देश के अन्य बड़े शहरों के युवा भी तेजी से इन आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं, जिससे उनकी रोजमर्रा की जीवनशैली में बदलाव आ रहा है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया रुझान किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या यह डिजिटल जुड़ाव भविष्य में इंसानी रिश्तों का विकल्प बनेगा या उनके पूरक के रूप में कार्य करेगा। फिलहाल, इस सर्वे ने दुनियाभर के मनोवैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जो इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि युवा पीढ़ी क्यों तेजी से आभासी दुनिया की ओर आकर्षित हो रही है।