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कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर शिकंजा: डीपफेक वीडियो और तस्वीरों के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सरकार ने लागू किए कड़े नियम

देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के गलत इस्तेमाल और डीपफेक की बढ़ती घटनाओं पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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Kantap News डेस्क
11 अग 2026, 16:15
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर शिकंजा: डीपफेक वीडियो और तस्वीरों के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सरकार ने लागू किए कड़े नियम
आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से इसके नकारात्मक पहलू भी सामने आ रहे हैं। विशेषकर डीपफेक वीडियो और मॉर्फ्ड तस्वीरों के जरिए समाज में फैलाई जा रही अफवाहों और धोखाधड़ी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी नीति को बेहद सख्त कर दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना और गलत सूचनाओं के प्रसार को तुरंत रोकना है। इस संबंध में सभी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों और इंटरनेट मध्यस्थों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे भ्रामक सामग्री के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करें।

सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ी जवाबदेही

नए प्रावधानों के तहत अब किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक या डीपफेक सामग्री पाए जाने पर उसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर उस मंच के प्रबंधन की होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी उपयोगकर्ता किसी सेलिब्रिटी, राजनेता या आम नागरिक की फेक वीडियो या तस्वीर अपलोड करता है, तो शिकायत मिलने के निर्धारित समय के भीतर उसे हटाना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर मध्यस्थता के कानूनी संरक्षण यानी सेफ हार्बर क्लॉज को समाप्त किया जा सकता है, जिससे कंपनियों पर भारी आर्थिक दंड और कानूनी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से फर्जी खबरों के कारोबार पर लगाम लगेगी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अधिक पारदर्शी बनेंगे।

सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर कदम

सरकार के इस कड़े कदम का स्वागत देश भर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और आम जनता द्वारा किया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में डीपफेक तकनीक के जरिए कई प्रतिष्ठित हस्तियों की छवि को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए थे, जिसने नीति निर्माताओं को झकझोर कर रख दिया था। प्रशासन अब न केवल तकनीकी दिग्गजों पर नजर रख रहा है, बल्कि उपयोगकर्ताओं को भी जागरूक कर रहा है कि वे बिना पुष्टि किए किसी भी वीडियो या तस्वीर को साझा न करें। आने वाले दिनों में इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष निगरानी सैल भी गठित किए जाने की योजना है, जो डिजिटल स्पेस पर पैनी नजर रखेगा।
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