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मौसम का कमाल: तपती धूप में भी 22 डिग्री ठंडी रहेगी छत, खास तकनीक आई सामने
वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने बढ़ती गर्मी से निजात पाने के लिए एक अभूतपूर्व तकनीक विकसित की है। पैसिव डेटाइम रेडिएटिव कूलिंग तकनीक नामक इस नई खोज के जरिए भीषण गर्मी और तपती धूप में भी इमारतों की छतों को 22 डिग्री तक ठंडा रखा जा सकता है, जो आधुनिक वास्तुकला में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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Ankit Yadav
26 अग 2026, 13:22
बढ़ते वैश्विक तापमान और भीषण गर्मी के इस दौर में इमारतों को ठंडा रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। एयर कंडीशनर और अन्य कूलिंग उपकरणों का अत्यधिक उपयोग न केवल बिजली के बिलों को बढ़ाता है बल्कि पर्यावरण पर भी भारी दबाव डालता है। इसी समस्या का स्थायी और ऊर्जा-कुशल समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रकार की कोटिंग तैयार की है, जो बिना किसी बिजली या बाहरी ऊर्जा के छतों को ठंडा बनाए रखने में सक्षम है। इस क्रांतिकारी तकनीक को पैसिव डेटाइम रेडिएटिव कूलिंग नाम दिया गया है, जो प्राकृतिक सिद्धांतों का उपयोग करके काम करती है।
कैसे काम करती है पैसिव डेटाइम रेडिएटिव कूलिंग तकनीक
इस तकनीक का मुख्य आधार सौर विकिरण को परावर्तित करना और थर्मल ऊर्जा को अंतरिक्ष में उत्सर्जित करना है। आम तौर पर सीमेंट और कंक्रीट से बनी छतें सूरज की रोशनी को सोख लेती हैं, जिससे इमारत के अंदर का तापमान बहुत बढ़ जाता है। लेकिन इस खास कोटिंग की विशेषता यह है कि यह सूर्य के प्रकाश को अधिकतम स्तर पर रिफ्लेक्ट करती है और साथ ही थर्मल रेडिएशन के जरिए गर्मी को सीधे वायुमंडल के ठंडे हिस्सों में छोड़ देती है। इसके परिणामस्वरूप, भीषण धूप और चिलचिलाती गर्मी के दिनों में भी छत का तापमान सामान्य तापमान की तुलना में बाईस डिग्री सेल्सियस तक कम बना रह सकता है।
यह तकनीक विशेष रूप से उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों और उन इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकती है जहां गर्मियों के महीनों में तापमान चरम सीमा को पार कर जाता है। पारंपरिक कूलिंग सिस्टम्स के विपरीत, इसके संचालन के लिए किसी प्रकार के ईंधन या बिजली की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यही कारण है कि इसे पर्यावरण के अनुकूल और पूरी तरह से टिकाऊ समाधान माना जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में हीट आइलैंड इफेक्ट को कम करने में भी यह तकनीक बेहद मददगार साबित हो सकती है, क्योंकि यह आसपास के वातावरण में अतिरिक्त गर्मी छोड़ने के बजाय उसे नियंत्रित रखती है।
भविष्य की संभावनाएं और व्यापक प्रभाव
आने वाले समय में इस तकनीक के व्यावसायिक स्तर पर उपलब्ध होने की उम्मीद है, जिससे आम जनता और बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य करने वाली कंपनियों को सीधा लाभ मिलेगा। आवासीय भवनों से लेकर बड़े औद्योगिक परिसरों और दफ्तरों की छतों पर इस कोटिंग का उपयोग करके ऊर्जा की भारी खपत को रोका जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के हरित और ऊर्जा-बचत वाले उपायों को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो कार्बन उत्सर्जन को कम करने के वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी काफी मदद मिल सकती है। शोधकर्ता अब इसे और अधिक किफायती और लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए निरंतर परीक्षण कर रहे हैं, ताकि समाज के हर वर्ग तक इसका लाभ पहुंच सके।