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रेलवे का नया कीर्तिमान: पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाली पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण गुवाहाटी में संपन्न
भारतीय रेलवे ने पर्यावरण अनुकूल परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का प्रायोगिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 13:54
भारतीय रेलवे के तकनीकी विंग ने आज असम के गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से एक नए युग की शुरुआत करते हुए देश की पहली हाइड्रोजन संचालित यात्री ट्रेन का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया। इस विशेष ट्रेन ने गुवाहाटी से कामख्या खंड के बीच 45 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसे देखने के लिए पटरियों के दोनों ओर हजारों की संख्या में स्थानीय लोग और रेलवे अधिकारी मौजूद थे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक न केवल कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने में मदद करेगी बल्कि पूर्वोत्तर के दुर्गम और संवेनशील पहाड़ी इलाकों में ट्रेन संचालन को और अधिक सुरक्षित और शांत बनाएगी। इस पूरी परियोजना पर पिछले तीन वर्षों से काम चल रहा था, जिसमें आधुनिक जर्मन और स्वदेशी तकनीक का अनूठा मिश्रण तैयार किया गया है। ट्रेन में लगे विशेष ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली पैदा करते हैं, जिससे केवल जल वाष्प का उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। इस परीक्षण के दौरान रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने गति, ब्रेक क्षमता, और तापमान नियंत्रण प्रणालियों की बारीकी से जांच की, जिसके परिणाम उम्मीद से कहीं अधिक बेहतर पाए गए। आगामी सर्दियों तक इस ट्रेन को नियमित वाणिज्यिक सेवा में शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय पर्यटन को भी एक नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
परीक्षण के तकनीकी पहलू और विशेषताएं
इस हाइड्रोजन ट्रेन की डिजाइनिंग और निर्माण में मेक इन इंडिया पहल का पूरी तरह से पालन किया गया है, जिसे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया है। ट्रेन के प्रत्येक कोच में उन्नत सेंसर लगाए गए हैं जो किसी भी तकनीकी खराबी या गैस रिसाव की स्थिति में तुरंत ड्राइवर को सतर्क करते हैं। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा के लिए वातानुकूलित बोगियां, स्वचालित दरवाजे, और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रेन के संचालन से डीजल इंजनों पर निर्भरता लगभग समाप्त हो जाएगी, जिससे हर साल करोड़ों रुपये के ईंधन आयात बिल की बचत होगी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि परीक्षण के दौरान ट्रेन ने अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल की, जो इस कठिन भौगोलिक क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस सफल परीक्षण के बाद अब देश के अन्य पहाड़ी मंडलों में भी इसी तर्ज पर हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन की योजना तैयार की जा रही है, जिससे भारतीय परिवहन प्रणाली वैश्विक स्तर पर एक मिसाल पेश कर रही है।
स्थानीय लोगों में उत्साह और भविष्य की योजनाएं
गुवाहाटी और आसपास के इलाकों में इस परीक्षण को लेकर भारी उत्साह देखा गया, और सोशल मीडिया पर भी यह ट्रेन दिनभर ट्रेंड करती रही। स्थानीय युवाओं और पर्यावरणविदों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदूषण मुक्त यात्रा का नया दौर शुरू होगा। रेलवे प्रशासन अब इस सफलता के आधार पर डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जैसे अन्य प्रमुख मार्गों पर भी इसके विस्तार की रूपरेखा तैयार कर रहा है। आने वाले महीनों में तकनीकी कर्मचारियों और ड्राइवरों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि वे इस अत्याधुनिक तकनीक का पूरी दक्षता के साथ संचालन कर सकें। इस प्रकार, यह परीक्षण भारतीय रेलवे के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है जो हरित ऊर्जा के भविष्य को आकार दे रहा है।