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टेक्नोलॉजी

तकनीकी कूटनीति: ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा बयान, एआई को हथियार न बनाने की अपील

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक के दुरुपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कभी भी संघर्ष या दबाव बनाने के हथियार के रूप में नहीं होना चाहिए।

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Ankit Yadav
15 सित 2026, 15:05
तकनीकी कूटनीति: ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा बयान, एआई को हथियार न बनाने की अपील
वैश्विक मंचों पर आज के समय में तकनीक और कूटनीति का तालमेल सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन चुका है। ब्रिक्स देशों के सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल संप्रभुता और तकनीकी निष्पक्षता का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चरम पर है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उन्नत तकनीकों का लाभ चुनिंदा देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक दक्षिण के विकास में इसका उपयोग सहयोगात्मक तरीके से होना चाहिए।

चीन की रणनीतिक चाल और एआई का भविष्य

इस कूटनीतिक हलचल के बीच वैश्विक स्तर पर चीन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी रणनीतियों और दांव-पेंचों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। आधुनिक युग में डिजिटल टूल्स और एल्गोरिदम का जिस प्रकार विस्तार हो रहा है, उससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जानकार मान रहे हैं कि चीन जिस प्रकार एआई और तकनीकी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, उसने अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह आह्वान कि टेक्नोलॉजी को भू-राजनीतिक जंग का जरिया नहीं बनना चाहिए, सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विकसित देशों के मुकाबले विकासशील राष्ट्रों के सामने डिजिटल डिवाइड को पाटने की बड़ी चुनौती है। यदि एआई और अन्य अत्याधुनिक तकनीकें केवल नियंत्रण और प्रभाव स्थापित करने का माध्यम बन जाएंगी, तो वैश्विक असमानता और गहरी हो सकती है। ब्रिक्स जैसे बड़े मंचों पर इस तरह के मुद्दों के उठने से सदस्य देशों के बीच एक साझा सहमति बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। भविष्य के सुरक्षा और आर्थिक ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए यह जरूरी है कि डिजिटल संसाधनों का नियमन पारदर्शी और समावेशी हो। आने वाले समय में इस बात की पूरी उम्मीद है कि ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर तकनीक के नैतिक इस्तेमाल को लेकर एक मजबूत कानूनी और वैचारिक ढांचा तैयार करने की मांग तेज होगी। भारत की ओर से लगातार यह स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निष्पक्ष तकनीक ही सतत विकास की असली कुंजी हैं। वैश्विक ताकतों को अब यह तय करना होगा कि वे तकनीक को टकराव का अखाड़ा बनाने के बजाय मानवता के कल्याण का साधन बनाएं।
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