आज एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आईआईटी मद्रास के निदेशक ने देश के तकनीकी शिक्षा परिदृश्य को बदलने वाली इस नई मास्टर डिग्री योजना का अनावरण किया। 'मास्टर इन क्वांटम टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड डेटा साइंस' नामक यह दो वर्षीय पाठ्यक्रम पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में संचालित किया जाएगा, ताकि देश और दुनिया के किसी भी कोने में बैठा छात्र बिना अपनी नौकरी छोड़े इस अत्याधुनिक तकनीक की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सके। पाठ्यक्रम की रूपरेखा उद्योग जगत की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिसमें क्वांटम एल्गोरिदम, क्रिप्टोग्राफी और अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटिंग प्रणालियों का गहन अध्ययन शामिल है।
उद्योग जगत की साझेदारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण के अवसर इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आईआईटी मद्रास ने दुनिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियों जैसे आईबीएम, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इन वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के वरिष्ठ वैज्ञानिक और इंजीनियर छात्रों को ऑनलाइन व्याख्यान देंगे और वर्चुअल लैब्स के माध्यम से उन्हें लाइव क्वांटम प्रोसेसर पर अभ्यास करने का अवसर प्रदान करेंगे। संस्थान के डीन ने बताया कि पाठ्यक्रम के अंतिम सेमेस्टर में सभी छात्रों के लिए एक अनिवार्य कैपस्टोन प्रोजेक्ट और इंटर्नशिप का प्रावधान रखा गया है, जिससे उन्हें वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने का व्यावहारिक अनुभव मिल सके और उद्योग जगत में उनके लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा हो सकें।
प्रवेश प्रक्रिया और पात्रता मानदंड इस मास्टर प्रोग्राम के लिए आवेदन प्रक्रिया आज से आधिकारिक पोर्टल पर शुरू हो चुकी है। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास विज्ञान, गणित या इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है, साथ ही उन्हें संस्थान द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। शिक्षाविदों का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटिंग भविष्य की तकनीक है और भारत में इस क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की भारी कमी है। आईआईटी मद्रास की यह पहल देश को वैश्विक क्वांटम मानचित्र पर एक मजबूत और अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करने में बेहद मददगार साबित होगी।