जुहू में कार पर फायरिंग और सुरक्षा को लेकर चिंता
मुंबई के जुहू इलाके में 18 अक्टूबर को फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर बाइक सवार हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई इस वारदात में अभिनेता बाल-बाल बच गए, हालांकि उनका कार चालक इस हमले में घायल हो गया। इस गंभीर घटना के बाद फिल्म निर्माण से जुड़ी सबसे बड़ी संस्था, फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने कड़ा रुख अपनाया है। संस्था के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने स्पष्ट किया है कि मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री इस समय अत्यंत डरे हुए माहौल में कार्य कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि टाइगर श्रॉफ पर हुआ हमला महज डराने के लिए नहीं, बल्कि उनकी जान लेने के उद्देश्य से किया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इंडस्ट्री के बड़े निकायों और पुलिस प्रशासन को तत्काल प्रभावी कदम उठाने की सख्त जरूरत है, ताकि कलाकारों और फिल्म क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सरकार से कार्रवाई की मांग और इंडस्ट्री का रुख
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज के प्रमुख बीएन तिवारी ने केंद्र के गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई के पुलिस आयुक्त को पत्र भेजा है। उन्होंने लिखित मांग की है कि बॉलीवुड से जुड़े लोगों को तत्काल सुरक्षा दी जाए। तिवारी ने चेतावनी दी है कि यदि मुंबई में कलाकारों को सुरक्षित वातावरण नहीं मिलता, तो पूरी फिल्म इंडस्ट्री उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपना आधार स्थानांतरित करने के लिए विवश हो सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीनों में कलाकारों को लगातार धमकियां मिल रही हैं, जिनमें से कई मामले सार्वजनिक भी नहीं हो पाते। उन्होंने जोर दिया कि चंद हमलावरों को पकड़ने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि पूरे अपराध सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ना जरूरी है क्योंकि बॉलीवुड को करोड़ों के काम के कारण अक्सर सॉफ्ट टारगेट के रूप में देखा जाता है।
आरे जंगल में प्रैक्टिस और 31 अक्टूबर तक रिमांड
पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि टाइगर श्रॉफ पर हमला करने वाले तीनों संदिग्ध शूटरों ने वारदात को अंजाम देने से पहले आरे के जंगलों में तीन से चार दिनों तक बंदूक चलाने का अभ्यास किया था। इन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और वे 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में हैं। इस घटना ने फिल्म जगत के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज, जिसकी स्थापना 1956 में हुई थी, अब इस मामले को लेकर अपनी पूरी ताकत लगा रहा है। संस्था का मानना है कि जब तक कलाकारों को सुरक्षा का ठोस भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक वे सेट पर पूरी एकाग्रता के साथ काम नहीं कर पाएंगे। यदि मुंबई में हालात नहीं सुधरे तो फिल्म मेकर्स शूटिंग के लिए दूसरे सुरक्षित राज्यों का रुख करेंगे क्योंकि कलाकारों की जान जोखिम में डालकर काम करना संभव नहीं है।