कंटाप
NEWS
रविवार, 6 सितंबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट में पांच मंज़िला इमारत गिरी, छह लोगों को बचाया गया      झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, देर रात पड़ा दिल का दौरा      कल का मौसम 7 सितंबर: 17 घंटे के भीतर 22 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 50 की स्पीड से हवा; IMD का अपडेट      'कश्मीर और लद्दाख हमारा है, भारत का नक्शा बदला तो अंजाम बुरा होगा': संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर MEA सख्त...      सहारनपुर में तोड़ी गई जो मस्जिद, उसके नीचे से निकला कुआं; सामने आया वीडियो      सबसे शर्मनाक... पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सली' तंज पर फिर भड़की कॉकरोच जनता पार्टी      ISRO के निजीकरण पर 9 कर्मचारी यूनियनों ने लिखी चिट्ठी, पूछा- क्या हम सिर्फ रिसर्च करेंगे      'शिक्षा-रोजगार मांगने पर गोली मार दी?', सीवान में घायल छात्रों से मिले राहुल गांधी, PM-CM से पूछे तीखे सवाल     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
बॉलीवुड

तीखा हमला: दायरा की डायरेक्टर मेघना गुलजार ने बॉलीवुड के ढोंग पर उठाए सवाल

बॉलीवुड की जानी-मानी डायरेक्टर मेघना गुलजार ने फिल्म इंडस्ट्री में पुलिसकर्मियों के चित्रण और वास्तविक जीवन के बीच के अंतर पर खुलकर बात की है।

A
Ankit Yadav
06 सित 2026, 16:50
तीखा हमला: दायरा की डायरेक्टर मेघना गुलजार ने बॉलीवुड के ढोंग पर उठाए सवाल
भारतीय सिनेमा जगत में इन दिनों कई तरह के मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो रही है। इसी कड़ी में हाल ही में अपनी आगामी या हालिया परियोजना 'दायरा' को लेकर चर्चा में रहीं प्रसिद्ध निर्देशिका मेघना गुलजार ने फिल्म जगत की कार्यशैली और बनावटीपन पर एक तीखा बयान दिया है। उन्होंने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा है कि फिल्मों में महज कुछ चुनिंदा संवाद बुलवा देने से कोई भी व्यक्ति या अभिनेता असली पुलिसकर्मी नहीं बन जाता है। उनका यह बयान फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर दिखाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों के सतही और नाटकीय स्वरूप पर एक गहरा कटाक्ष माना जा रहा है।

फिल्मों में यथार्थवाद बनाम दिखावा

उद्योग के भीतर चल रहे तमाम ढोंगों पर बात करते हुए मेघना ने इस बात पर जोर दिया कि पर्दे पर पुलिस की वर्दी पहनकर केवल चार दमदार डायलॉग बोल देना और असल जिंदगी में एक पुलिस अधिकारी के कर्तव्य व संघर्ष को जीना दोनों पूरी तरह से अलग बातें हैं। उनका मानना है कि निर्देशकों और लेखकों को अक्सर मनोरंजन के नाम पर वास्तविकता से परे जाकर चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की आदत होती है, जो कि समाज के एक जिम्मेदार तबके के साथ न्याय नहीं है। दर्शक भी अब इस तरह की सतही कहानियों को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं और प्रामाणिक सामग्री की मांग कर रहे हैं। फिल्म निर्माण की दुनिया में यथार्थवादी कहानियों के लिए अपनी खास पहचान रखने वाली मेघना गुलजार का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब सिनेमाई कला और सामाजिक यथार्थ के बीच की रेखाओं को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है। उनकी फिल्मों में हमेशा से ही संवेदनशीलता और गहराई देखने को मिलती है, चाहे वह राजी हो या छपाक। उनके इस नए दृष्टिकोण ने फिल्म इंडस्ट्री के अन्य कलाकारों और फिल्म निर्माताओं का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिससे यह सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि क्या मुख्यधारा का सिनेमा वास्तविक मुद्दों को पर्याप्त गंभीरता से पेश कर रहा है या नहीं। भविष्य में इस प्रकार की आलोचनाओं का बॉलीवुड के कथा-कहने के तरीकों पर क्या असर पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी। लखनऊ और देश के अन्य हिस्सों में बैठे सिनेमा प्रेमियों के बीच भी इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले समय में फिल्मों में अधिक यथार्थवादी और जमीन से जुड़े किरदारों को जगह मिलेगी। समीक्षकों का मानना है कि ऐसे बेबाक बयानों से फिल्मकारों को अपनी पटकथा पर अधिक गंभीरता से काम करने की प्रेरणा मिलती है, जिससे अंततः दर्शकों को एक बेहतर और सार्थक सिनेमाई अनुभव प्राप्त हो सके।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज