भारतीय शेयर बाजार और कॉरपोरेट जगत में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बाजार नियामक ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की इकाई Jio Platforms के करीब 3.8 अरब डॉलर के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी IPO को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद Jio Platforms की शेयर बाजार में सूचीबद्धता की दिशा में महत्वपूर्ण रास्ता साफ हो गया है। यदि IPO योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो यह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी शेयर बाजार लिस्टिंग में शामिल होगा और मौजूदा रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है। Jio Platforms देश के सबसे बड़े डिजिटल और टेलीकॉम कारोबारों में से एक है और उसके पास 53.3 करोड़ से अधिक मोबाइल ग्राहक होने की जानकारी दी गई है।
IPO से जुटाई जाएगी बड़ी रकम
प्रस्तावित IPO के तहत करीब 27 करोड़ शेयर जारी किए जाने की योजना है। कंपनी और उसके मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी को देखते हुए यह लिस्टिंग बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Jio Platforms में रिलायंस इंडस्ट्रीज की बड़ी हिस्सेदारी है, जबकि Meta और Google जैसे वैश्विक तकनीकी निवेशक भी कंपनी में हिस्सेदार हैं। IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से Reliance Jio Infocomm के कर्ज को कम करने के लिए किए जाने की योजना है। कंपनी ने पिछले वर्षों में टेलीकॉम से आगे बढ़कर AI, क्लाउड और एंटरप्राइज डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया है।
निवेशकों की नजर कंपनी के स्वतंत्र मूल्यांकन पर
Jio Platforms की लिस्टिंग से निवेशकों को कंपनी का स्वतंत्र बाजार मूल्यांकन देखने का अवसर मिलेगा। अभी कंपनी का कारोबार रिलायंस समूह की व्यापक संरचना का हिस्सा है, लेकिन शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद उसके प्रदर्शन, आय और भविष्य की विकास क्षमता को अलग तरीके से आंका जा सकेगा। भारत में पिछले कुछ समय से IPO बाजार में भी गतिविधियां बढ़ी हैं और कई कंपनियां पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में Jio Platforms की लिस्टिंग का असर पूरे बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि IPO की सफलता बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और कंपनी के अंतिम मूल्यांकन पर निर्भर करेगी।