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स्वच्छ ऊर्जा की पहल: हरियाणा के 4 शहरों में लगेंगे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, 5 हजार टन कचरे से बनेगी 50 मेगावाट बिजली

हरियाणा सरकार और ऑयल इंडस्ट्री ने राज्य के चार प्रमुख शहरों में अत्याधुनिक वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने का बड़ा कदम उठाया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए प्रतिदिन हजारों टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा।

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Ankit Yadav
02 सित 2026, 15:00
स्वच्छ ऊर्जा की पहल: हरियाणा के 4 शहरों में लगेंगे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, 5 हजार टन कचरे से बनेगी 50 मेगावाट बिजली
हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य सरकार और ऑयल इंडस्ट्री के बीच हुई नई साझेदारी के तहत हरियाणा के चार महत्वपूर्ण शहरों में विशेष वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे कचरे के पहाड़ों से निजात दिलाना और उसे एक उपयोगी संसाधन में तब्दील करना है। अधिकारियों के मुताबिक इन तमाम संयंत्रों के जरिए हर रोज लगभग 5 हजार टन कचरे का सफलतापूर्वक प्रसंस्करण किया जाएगा, जिससे न केवल शहरों की स्वच्छता व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार होगा बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

कचरे से बनेगी 50 मेगावाट बिजली

इन अत्याधुनिक कचरा-से-ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के बाद पर्यावरण और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में बड़े सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। नियोजित आंकड़ों के अनुसार इन चारों प्लांटों के सुचारू संचालन से कुल 50 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। यह हरित ऊर्जा राज्य की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता को कम करेगी। आज के समय में देश के तमाम महानगरों और उभरते हुए शहरी केंद्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस अपशिष्ट यानी सॉलिड वेस्ट के सही प्रबंधन की है। हरियाणा सरकार की यह दूरदर्शी पहल इस समस्या का एक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रदान करती है, जिससे नगरीय निकायों को भी बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। परियोजना की रूपरेखा तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि तकनीकी रूप से यह पूरी तरह आधुनिक और प्रदूषण मुक्त हो। संयंत्रों में कचरे के निष्पादन के दौरान पर्यावरण के मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार के हानिकारक प्रदूषण से बचा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की परियोजनाएं न केवल भारत के स्वच्छ भारत अभियान को मजबूती देती हैं बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा देती हैं जहां कचरे को संसाधन माना जाता है। आने वाले दिनों में इन संयंत्रों के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी और सरकार विभिन्न स्तरों पर इसकी नियमित समीक्षा भी करेगी। इस दिशा में प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है और जमीनी स्तर पर भूमि आवंटن तथा अन्य औपचारिकताओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने भी सरकार के इस कदम की सराहना की है क्योंकि इससे न केवल लैंडफिल साइटों पर कचरे का दबाव कम होगा बल्कि भू-जल प्रदूषण और हवा की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया जाएगा। हरियाणा में इस प्रकार की पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है जो शहरी कचरे की समस्या से जूझ रहे हैं और नवीकरणीय ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत तलाश रहे हैं।
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