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साइबर ठगी का जाल: बिजली बिल, केवाईसी और ई-चालान के नाम पर हो रही धोखाधड़ी, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

राजस्थान पुलिस ने राज्य में लगातार बढ़ रहे डिजिटल अपराधों को लेकर नागरिकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। बिजली बिल अपडेट करने, बैंक केवाईसी और ट्रैफिक ई-चालान के बहाने लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं।

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Ankit Yadav
09 सित 2026, 11:27
साइबर ठगी का जाल: बिजली बिल, केवाईसी और ई-चालान के नाम पर हो रही धोखाधड़ी, राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
देशभर के साथ-साथ राजस्थान में भी डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है। अपराधी किस्म के लोग आम नागरिकों को अपने जाल में फंसाने के लिए रोजाना नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। इसी क्रम में, जयपुर सहित पूरे प्रदेश में साइबर अपराधियों ने ठगी के नए तरीके तलाश लिए हैं, जिसमें मुख्य रूप से बिजली बिल, बैंक केवाईसी और ई-चालान को माध्यम बनाया जा रहा है। इन गंभीर मामलों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान पुलिस ने एक विशेष एडवाइजरी जारी की है, ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके और वे अपनी गाढ़ी कमाई को लुटेरों के हाथों गंवाने से बच सकें।

कैसे देते हैं ठगी को अंजाम

ऑनलाइन ठग आम तौर पर मोबाइल यूजर्स को एक टेक्स्ट मैसेज भेजते हैं, जिसमें दावा किया जाता है कि उनका बिजली का बिल बकाया है या बिजली का कनेक्शन काट दिया जाएगा। मैसेज में दिए गए नंबर पर संपर्क करने या एक फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही पीड़ित उस लिंक पर क्लिक करता है या अपनी गोपनीय जानकारी साझा करता है, ठगों को उनके बैंक खातों तक सीधी पहुंच मिल जाती है। ठीक इसी तरह, बैंक खाते का केवाईसी अपडेट कराने या ट्रैफिक चालान के भुगतान के नाम पर भी लोगों को डराया धमकाया जाता है। पुलिस विभाग द्वारा साझा की गई विशेष रिपोर्ट और वीडियो के माध्यम से यह समझाया गया है कि किस प्रकार से ये जालसाज तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। अधिकारी लगातार यह अपील कर रहे हैं कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए लिंक पर क्लिक न किया जाए और न ही अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा की जाए। यदि किसी के साथ इस प्रकार की कोई घटना घटित होती है, तो उसे तुरंत आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। आगामी दिनों में पुलिस और प्रशासन इस दिशा में जागरूकता अभियान को और अधिक तेज करने की योजना बना रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि डिजिटल साक्षरता को बढ़ाया जा सके और तकनीकी धोखाधड़ी के नए तौर-तरीकों से लोगों को अवगत कराया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि केवल सतर्कता और सावधानी बरतकर ही इस प्रकार के संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
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