ऐतिहासिक विकास और सोवियत संघ के साथ शुरुआती शुरुआत
अपनी स्थापना के शुरुआती दौर में ही इस संस्थान ने युद्धकाल की आवश्यकताओं को पूरा करने का बीड़ा उठाया था। सेना और देश के वास्ते उच्च कोटि के वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने के उद्देश्य से इसे पॉलिटेक्निक विश्वविद्यालय की शाखा दो के रूप में जाना जाता था। उस समय उच्चाधिकारियों ने यह सलाह दी थी कि कई प्रतिभाशाली अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को बेहतर वैज्ञानिक शिक्षा प्राप्त करने के वास्ते सोवियत संघ तथा अन्य समाजवादी देशों में भेजा जाए। इस कदम ने आगे चलकर वियतनामी सैन्य विज्ञान और देश की तकनीकी उन्नति के तमाम क्षेत्रों के विकास की मजबूत नींव रखी थी। देश के एकीकरण के बाद इस शैक्षणिक संस्थान ने दो चरणों वाले शिक्षण मॉडल को अपनाकर वैश्विक मेलजोल को और अधिक बढ़ावा दिया। इससे विद्यार्थियों तथा अधिकारियों को आधुनिक वैज्ञानिक खोजों और बेहतर अनुसंधान परिवेश का लाभ मिलने लगा। नतीजतन, राष्ट्र की रक्षा जरूरतों और देश के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए योग्य इंजीनियरों तथा वैज्ञानिकों की एक प्रशिक्षित टीम तैयार होने में मदद मिली। वर्ष 1991 इस संस्था के सफर में एक बहुत बड़ा मोड़ साबित हुआ जब इसका नाम बदलकर आधिकारिक रूप से ले क्यूई डॉन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कर दिया गया। इस बदलाव के बाद घरेलू तथा विदेशी नागरिक साझेदारों के साथ काम करने के लिए सहयोग के नए और विस्तृत द्वार खुल गए, जिससे वैश्विक पटल पर इसकी पकड़ और अधिक मजबूत हो गई।
रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार और वैश्विक सहयोग
सुधार और वैश्विक एकीकरण के इस दौर में पार्टी की विदेश नीति और रक्षा कूटनीति से जुड़े दिशा-निर्देशों का गहराई से पालन किया जा रहा है। विशेष तौर पर केंद्रीय सैन्य आयोग द्वारा 31 दिसंबर 2013 को जारी किए गए संकल्प संख्या 806 के तहत कई योजनाएं और कार्यक्रम अमल में लाए गए हैं। इसके अलावा 24 जनवरी 2025 को पोलित ब्यूरो के संकल्प तथा 26 फरवरी 2024 को जारी निर्देशों के माध्यम से अधिकारियों को इसकी भूमिका समझाई जा रही है। रूसी संघ, पूर्वी यूरोपीय राष्ट्रों और क्यूबा के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के साथ अपने पुराने पारंपरिक संबंधों को कायम रखते हुए इस अकादमी ने अपने दायरे को काफी बढ़ाया है। अब जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, भारत और कई यूरोपीय देशों के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों के साथ भी आपसी सहयोग स्थापित किया जा रहा है। हजारों कर्मचारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने विदेशों में स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर की पढ़ाई तथा इंटर्नशिप पूरी की है। वे वहां से नया ज्ञान, आधुनिक शिक्षण तकनीक और शोध के नए तरीके अपने संस्थान में लेकर आए हैं। दुनिया भर के नामी विश्वविद्यालयों के चुनिंदा उन्नत पाठ्यक्रमों और सामग्री का अनुवाद कर उन्हें अपने प्रशिक्षण तंत्र में शामिल किया गया है। अकादमिक आदान-प्रदान, शोध छात्रों के सह-पर्यवेक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक परियोजनाओं में सहभागिता से इस शिक्षण केंद्र की प्रतिष्ठा में काफी इजाफा हुआ है।
भविष्य की योजनाएं और पूर्व तथा पश्चिम की ओर विस्तार
वर्तमान समय में वैश्विक एकीकरण और डिजिटल बदलाव किसी भी राष्ट्र की कुल शक्ति और उसकी प्रतिस्पर्धा को तय करने वाले सबसे बड़े कारक बन चुके हैं। ऐसे में राष्ट्रीय रक्षा को मजबूत बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर बौद्धिक और तकनीकी संसाधनों को जोड़ना इस संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अकादमी ने अपने प्रशासनिक तंत्र को अधिक लचीला और खुला बनाने का निर्णय लिया है ताकि वैज्ञानिकों को शोध निधि तक आसानी से पहुंच मिल सके। इसके तहत रूसी संघ के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को और गहरा करने के साथ ही एक नई रणनीति पर काम शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, भारत और यूरोप के शीर्ष विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाओं में अपनी पहुंच का विस्तार किया जा रहा है। स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालक, क्वांटम कंप्यूटिंग और नई सामग्री जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्रों में अग्रणी संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारियां बनाई जा रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद तकनीकी महाशक्तियों की क्षमताओं का पूरा लाभ उठाते हुए विकास के अंतर को पाटना और बजट तथा शोध के समय की बचत करना है। इन सभी ठोस कदमों के जरिए यह संस्थान खुद को सेना और राष्ट्र के अग्रणी अनुसंधान विश्वविद्यालय तथा नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।