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रक्षा और सुरक्षा

रणनीतिक साझेदारी: भारत और रूस के बीच मजबूत हो रहे रक्षा संबंध, चीन-पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

भारत और रूस ने अपने सामरिक और रक्षा संबंधों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इस नई तैयारी से वैश्विक कूटनीति में हलचल मच गई है और पड़ोसी देशों की बेचैनी बढ़ गई है।

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Ankit Yadav
17 सित 2026, 16:26
रणनीतिक साझेदारी: भारत और रूस के बीच मजबूत हो रहे रक्षा संबंध, चीन-पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
नई दिल्ली और मॉस्को के बीच कूटनीतिक स्तर पर द्विपक्षीय संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। इसी क्रम में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करने के लिए बड़ी योजनाएं बनाई हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भारत और रूस की इस बढ़ती नजदीकी से सीमावर्ती प्रतिद्वंद्वी देशों, विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में चिंता की लहर दौड़ गई है। दोनों राष्ट्र लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार रहे हैं और इस ताज़ा पहल से उनके पुराने व गहरे रिश्तों को और नई ऊर्जा मिलने की पूरी उम्मीद है।

रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा आपसी सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान

दोनों देशों के बीच होने वाली इन नई रणनीतिक पहलों के तहत आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त सैन्य अभ्यासों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घनिष्ठता से भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता में अभूतपूर्व इजाफा होगा। मॉस्को और नई दिल्ली के बीच पहले से ही कई बड़े रक्षा समझौते क्रियान्वित हो रहे हैं, और इस नई तैयारी से इन समझौतों का दायरा और अधिक विस्तृत होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी इस भू-राजनीतिक विकास पर पैनी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव देश की सुरक्षा और विदेशी नीतियों पर पड़ता है। क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक संतुलन के दृष्टिकोण से भी भारत-रूस की यह साझेदारी बेहद अहम मानी जा रही है। पश्चिमी देशों के तमाम दबावों और वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों की गर्माहट को कम नहीं होने दिया है। इसके विपरीत, आपसी विश्वास को और प्रगाढ़ करते हुए नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। पड़ोसी देशों की सरकारों और सैन्य विश्लेषकों द्वारा इन गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, क्योंकि एक मजबूत भारत-रूस गठजोड़ एशियाई भू-राजनीति में शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित करने की क्षमता रखता है। आगामी दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस संबंध में और भी उच्चस्तरीय बैठकों के होने की संभावना जताई जा रही है। इन बैठकों में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लंबित और नए प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लग सकती है। भारतीय रक्षा मंत्रालय और कूटनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर पूरा उत्साह है कि यह साझेदारी देश को वैश्विक मंच पर और अधिक आत्मनिर्भर तथा शक्तिशाली बनाएगी।
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