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बढ़ता खतरा: भारत में 100 बड़ी ग्लेशियल झीलों की निगरानी, एक राज्य में 34 झीलों का जलस्तर बढ़ा

भारत में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच देश की करीब 100 बड़ी ग्लेशियल झीलों पर पैनी नजर रखी जा रही है। विशेष रूप से एक पहाड़ी राज्य में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां गंभीर खतरा मंडरा रहा है और 34 झीलों में जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

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Ankit Yadav
31 अग 2026, 15:09
बढ़ता खतरा: भारत में 100 बड़ी ग्लेशियल झीलों की निगरानी, एक राज्य में 34 झीलों का जलस्तर बढ़ा
देशभर में लगातार बदल रहे मौसम और तापमान में वृद्धि के कारण हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक संकट गहराता जा रहा है। इसी सिलसिले में वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों ने देश की लगभग 100 सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी ग्लेशियल झीलों की निगरानी प्रक्रिया को बेहद कड़ा कर दिया है। यह कदम संभावित प्राकृतिक आपदाओं से समय रहते निपटने और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इन झीलों का लगातार अध्ययन करना बेहद आवश्यक हो गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति का पूर्वानुमान लगाया जा सके।

एक पहाड़ी राज्य में गंभीर खतरा

प्राप्त जानकारियों के अनुसार, स्थिति विशेष रूप से एक पर्वतीय राज्य के लिए अधिक चिंताजनक बनती जा रही है, जहां पर्यावरण और मौसम के बदलते मिजाज ने संकट को और बढ़ा दिया है। इस क्षेत्र में चिह्नित की गई प्रमुख झीलों में से कम से कम 34 ऐसी झीलें हैं जिनके जलस्तर में हाल ही में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। पानी का यह असामान्य फैलाव और स्तर का ऊपर उठना इस बात का संकेत है कि ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव इन ऊंचे पर्वतीय इलाकों में तेजी से असर दिखा रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाली आबादी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लेशियल झीलों के ओवरफ्लो होने या उनके तटबंध कमजोर पड़ने से ग्लेशियर लेक आउटबस्ट फ्लड यानी जीएलओएफ की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी घटनाओं में अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की घाटियों में बहकर आता है, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही मचने की आशंका रहती है। अतीत में भी इस प्रकार की घटनाओं ने पहाड़ी राज्यों में भारी जान-माल का नुकसान पहुंचाया है। यही वजह है कि इस बार प्रशासन और वैज्ञानिक किसी भी तरह की लापरवाही बरतना नहीं चाहते हैं और लगातार आधुनिक तकनीकों की मदद से इन जलस्रोतों पर उपग्रह और मैदानी सेंसर के जरिए नजर बनाए हुए हैं।

सतर्कता और आगामी कदम

बढ़ते खतरे को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन बलों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को और अधिक मजबूत किया जा रहा है ताकि जलस्तर में किसी भी अचानक बदलाव या खतरे की स्थिति में तुरंत स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। इसके अलावा, वैज्ञानिकों की विशेष टीमें उन झीलों का भौतिक और तकनीकी अध्ययन करने में जुटी हैं जो ज्यादा जोखिम भरी श्रेणी में आती हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना है ताकि किसी भी अप्रिय आपदा से होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों पर भी विचार किया जा रहा है।
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