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चिंतक एम.पी. परमेश्वरन का निधन: 'चौथी दुनिया' के विवादित वैचारिक सिद्धांत के प्रणेता का 91 वर्ष की आयु में हुआ देहांत

देश के जाने-माने समाजवादी विचारक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समर्थक एम.पी. परमेश्वरन का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 12:14
चिंतक एम.पी. परमेश्वरन का निधन: 'चौथी दुनिया' के विवादित वैचारिक सिद्धांत के प्रणेता का 91 वर्ष की आयु में हुआ देहांत
भारतीय बौद्धिक और वैचारिक हलकों में एक अलग पहचान रखने वाले प्रसिद्ध वामपंथी विचारक और वैज्ञानिक एम.पी. परमेश्वरन ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनके निधन की खबर से सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने समाज सुधार, विज्ञान प्रचार और वैकल्पिक विकास मॉडल जैसे विषयों पर खुलकर अपने विचार रखे। उनके द्वारा प्रतिपादित 'चौथी दुनिया' (Fourth World) का सिद्धांत काफी चर्चा में रहा था, जिसने विकास और आधुनिकीकरण की पारंपरिक परिभाषाओं पर एक नई बहस को जन्म दिया था। उन्होंने हमेशा जमीनी स्तर पर जन-शिक्षा और जन-विज्ञान आंदोलनों को बढ़ावा देने में अपना जीवन समर्पित किया।

विज्ञान प्रसार और सामाजिक योगदान

एम.पी. परमेश्वरन का जन्म केरल में हुआ था और उन्होंने अपने शुरुआती करियर में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी काम किया था, लेकिन बाद में वे पूरी तरह से जन-आंदोलनों और वैचारिक बहसों से जुड़ गए। केरल शास्त्र साहित्य परिषद के माध्यम से उन्होंने विज्ञान को आम जनता की भाषा में समझाने और अंधविश्वासों के खिलाफ अलख जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वैज्ञानिक सोच हर नागरिक के दैनिक जीवन का हिस्सा बने। उनके लेख और पुस्तकें आज भी बुद्धिजीवियों के बीच अध्ययन का विषय हैं और उनकी वैचारिक स्पष्टता ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है।

एक युग का अंत

उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रमुखों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि उनके जाने से देश ने एक ऐसा मुखर चिंतक खो दिया है जो हमेशा जनहित के मुद्दों पर बिना किसी समझौते के अपनी बात रखता था। यद्यपि उनके कुछ विचार और सिद्धांत राजनीतिक गलियारों में विवादित भी रहे, लेकिन उनके बौद्धिक योगदान को कभी नकारा नहीं जा सकता। उनकी यादें और उनके द्वारा शुरू किए गए सामाजिक सुधार के कार्य आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरित करते रहेंगे, और उनका वैचारिक सफर इतिहास के पन्नों में हमेशा अमर रहेगा।
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