हाल के दिनों में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसी रिपोर्ट्स तेजी से फैली थीं, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत और इजरायल के बीच किसी नए और बड़े डिफेंस पैक्ट पर हस्ताक्षर हुए हैं। इन खबरों के तूल पकड़ने के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि ये सभी दावे पूरी तरह निराधार, काल्पनिक और मनगढ़ंत हैं। मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने बताया कि इस तरह की भ्रामक सामग्री आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और गलत नीयत वाले तत्वों द्वारा जानबूझकर फैलाई जा रही है ताकि जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की जा सके और गलत सूचनाओं को बढ़ावा दिया जा सके।
तकनीक का खतरनाक होता रूप तकनीक के विकास के साथ-साथ इसके दुरुपयोग के मामले भी चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। विशेषकर एआई जनित फर्जी दस्तावेज, वीडियो और ऑडियो क्लिप्स अब राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के लिए भी एक चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की फर्जी डिफेंस डील्स की खबरें न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलतफहमियां पैदा करती हैं, बल्कि देश की साख को भी प्रभावित करने की साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की रक्षा नीतियां और आधिकारिक समझौते हमेशा पारदर्शी तरीके से संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से सार्वजनिक किए जाते हैं।
जनता और मीडिया के लिए चेतावनी इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों और साइबर सेल ने सोशल मीडिया पर इस तरह की संवेदनशील और बिना पुष्टि वाली खबरों को साझा करने वालों के खिलाफ कड़ी निगरानी रखनी शुरू कर दी है। सरकार ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी सनसनीखेज दावे पर आँख मूंदकर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारियों पर ही यकीन रखें।