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इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश: दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले विशेष शिक्षकों को मिले वेतन समानता

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा कि विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चों (CWSN) को पढ़ाने वाले विशेष शिक्षकों को सामान्य शिक्षकों के समान वेतन मिलना चाहिए।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 18:26
इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश: दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले विशेष शिक्षकों को मिले वेतन समानता
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ ने उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs - CWSN) की शिक्षा से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने विशेष शिक्षकों (Special Educators) द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग को स्पष्ट आदेश दिया है कि संविदा या मानदेय पर काम कर रहे विशेष शिक्षकों की वेतन विसंगति को तुरंत दूर किया जाए और उन्हें समान काम के लिए सामान्य नियमित शिक्षकों के समकक्ष समान वेतन व भत्ते प्रदान किए जाएं। अदालत ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा देना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, इसलिए इन शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

अदालत की कड़ी टिप्पणी और राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट का हवाला

हाईकोर्ट ने अपने 25 पन्नों के विस्तृत फैसले में 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016' और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के दिशानिर्देशों का विशेष रूप से उल्लेख किया। अदालत ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि योग्य बीएड-स्पेशल एजुकेशन डिग्रीधारक होने के बावजूद इन शिक्षकों को बहुत ही कम मानदेय पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जो कि उनके संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने राज्य सरकार को 3 महीने के भीतर एक विशेष नीति तैयार करने और पात्र शिक्षकों के समतुल्य वेतनमान निर्धारित करने की अंतिम समय-सीमा प्रदान की है।

प्रदेश के हजारों विशेष अध्यापकों में खुशी की लहर

उच्च न्यायालय के इस फैसले के आते ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कार्यरत 12,000 से अधिक विशेष शिक्षकों और उनके संघों में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ गई। पिछले कई सालों से यह शिक्षक समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की मांग को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे। शिक्षक प्रतिनिधियों ने अदालत के इस फैसले को न्याय की जीत करार दिया। इस फैसले से न केवल विशेष अध्यापकों का जीवन स्तर और मनोबल सुधरेगा, बल्कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चों को भी अधिक लगन और गुणवत्ता के साथ शिक्षा प्राप्त हो सकेगी।
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