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पर्यावरण की अनूठी पहल: मध्य प्रदेश के इस गांव ने सौर ऊर्जा से पूरी तरह जगमगाकर हासिल किया शून्य कार्बन उत्सर्जन का दर्जा
मध्य प्रदेश के एक छोटे से दूरदराज के गांव ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सामुदायिक सहयोग के बल पर पारंपरिक बिजली ग्रिड पर अपनी निर्भरता पूरी तरह समाप्त कर देश का पहला शत-प्रतिशत सौर ऊर्जा संचालित गांव बनने का गौरव प्राप्त किया है।
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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:03
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के अंतर्गत आने वाले सुंदरपुर गांव ने आज पूरे देश के सामने स्वच्छ ऊर्जा का एक नया और प्रेरणादायक मानक स्थापित किया है। इस गांव के प्रत्येक घर, खेत और सामुदायिक भवन पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिससे अब डीजल जनरेटर या कोयले से बनने वाली बिजली की जरूरत पूरी तरह समाप्त हो गई है। जिला प्रशासन और गैर-सरकारी संगठनों के संयुक्त प्रयासों से इस परियोजना को पिछले एक वर्ष में अमली जामा पहनाया गया है। गांव के सरपंच ने गर्व के साथ बताया कि अब यहाँ के किसानों को सिंचाई के लिए बिजली कटौती की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि उनके सभी पंप सेट सौर ऊर्जा से सीधे संचालित होते हैं। इस बदलाव से न केवल ग्रामीणों के मासिक बिजली बिल शून्य हो गए हैं, बल्कि पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में भी भारी कमी आई है, जिसे राष्ट्रीय पर्यावरण अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रमाणित किया गया है।
तकनीकी व्यवस्था और बैटरी भंडारण प्रणाली
इस गांव में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र की कुल क्षमता एक मेगावाट है, जिसके साथ ही उन्नत लिथियम-आयन बैटरी भंडारण प्रणालियों को जोड़ा गया है। इन बैटरियों में दिन के समय अतिरिक्त उत्पन्न होने वाली सौर ऊर्जा को सुरक्षित रख लिया जाता है, जिससे बादलों वाले दिनों में या रात के समय भी बिना किसी रुकावट के निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। गांव के हर घर में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं जो मोबाइल ऐप के जरिए ऊर्जा की खपत पर नजर रखते हैं, जिससे किसी भी प्रकार की बर्बादी को रोका जा सके। इस पूरी तकनीक के रख-रखाव के लिए गांव के ही युवाओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर ही सभी तकनीकी समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकें।
ग्रामीण जीवनशैली में बदलाव और भविष्य के लक्ष्य
इस अभूतपूर्व परिवर्तन ने सुंदरपुर गांव के लोगों की जीवनशैली को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। रात के समय सड़कों पर सोलर स्ट्रीट लाइटें जगमगाती हैं, और महिलाओं को पारंपरिक चूल्हों के धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए इंडक्शन चूल्हों का उपयोग भी इसी सौर ऊर्जा से किया जा रहा है। इस सफलता से प्रेरित होकर आसपास के पंद्रह अन्य गांवों ने भी अपने यहां सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रस्ताव पारित किए हैं। राज्य सरकार अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की एक वृहद योजना तैयार कर रही है, जिससे भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को समय से पहले प्राप्त किया जा सके।