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राजधानी के सुनियोजित विकास को नई दिशा: 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' को मिली मंजूरी, किफायती आवास और यमुना संरक्षण पर जोर

दिल्ली के अगले दो दशकों के सुनियोजित और टिकाऊ विकास का रोडमैप तैयार हो गया है। 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है, जिसमें हरित क्षेत्रों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 18:09
राजधानी के सुनियोजित विकास को नई दिशा: 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' को मिली मंजूरी, किफायती आवास और यमुना संरक्षण पर जोर
देश की राजधानी दिल्ली को वर्ष 2047 तक विश्वस्तरीय, प्रदूषण-मुक्त और सुव्यवस्थित महानगर बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' (MPD-2047) को सक्षम प्राधिकारी द्वारा अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी गई है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा विभिन्न हितधारकों, शहरी योजनाकारों और आम जनता के सुझावों को शामिल करने के बाद इस नीतिगत दस्तावेज को अंतिम रूप दिया गया है। इस नए मास्टर प्लान का मुख्य ध्यान राजधानी में तेजी से बढ़ती आबादी के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराना, सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को पूरी तरह हरित ऊर्जा पर स्थानांतरित करना, और यमुना नदी के डूब क्षेत्र (floodplains) का वैज्ञानिक संरक्षण सुनिश्चित करना है। यह नीतिगत ढांचा अगले दो दशकों के लिए दिल्ली के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देगा।

यमुना खादर का संरक्षण और 'मिक्स-लैंड यूज' नीति

मास्टर प्लान 2047 में यमुना नदी के तटबंधों और खादर क्षेत्र में किसी भी प्रकार के पक्के निर्माण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध बरकरार रखा गया है। इसके स्थान पर यमुना किनारे जैव-विविधता पार्क (Biodiversity Parks) और हरित कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा, दिल्ली में अनाधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास और 'मिक्स-लैंड यूज' (आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों का नियंत्रित संगम) के नियमों को अधिक व्यावहारिक और लचीला बनाया गया है, जिससे छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी। नए नियमों के तहत पुरानी इमारतों के पुनरोद्धार और वर्टिकल डेवलपमेंट (ऊंची इमारतों के निर्माण) को प्रोत्साहन दिया जाएगा ताकि जमीन की कमी की समस्या से निपटा जा सके।

प्रदूषण नियंत्रण और टिकाऊ शहरी परिवहन का लक्ष्य

इस मास्टर प्लान में राजधानी की सबसे बड़ी समस्या यानी वायु और जल प्रदूषण से निपटने के लिए कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं। नए औद्योगिक क्षेत्रों में केवल शून्य-उत्सर्जन (zero-emission) और आईटी उद्योगों को ही अनुमति दी जाएगी। शहर के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए हर 500 मीटर पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना अनिवार्य किया गया है। शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मास्टर प्लान के प्रावधानों को धरातल पर कड़ाई से लागू किया जाता है, तो दिल्ली न केवल रहने योग्य एक स्वच्छ शहर बनेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर एक आधुनिक और सतत (sustainable) राजधानी के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगी।
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