बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आज रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय परिसर में एक भव्य वृक्षारोपण महोत्सव का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति, वरिष्ठ प्रोफेसरों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने मिलकर परिसर के खाली पड़े विशाल भूखंडों पर छायादार, फलदार और औषधीय पौधे रोपे। इस अभियान के तहत विशेष रूप से उन देशी प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी गई है जो हरियाणा की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल हैं और कम पानी में भी तेजी से विकसित होते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह विश्वविद्यालय के वानिकी उद्यान से की गई जहाँ छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ मिट्टी में पौधे लगाए और उनकी नियमित देखभाल करने की शपथ ली।
इको-पार्क और जैव विविधता संरक्षण क्षेत्र का निर्माण
इस महाअभियान के तहत केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय परिसर के भीतर एक समर्पित 'इको-पार्क' और 'बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन ज़ोन' विकसित करने का भी शिलान्यास किया गया है। इस इको-पार्क में वॉकिंग ट्रेल्स, बर्ड फीडर, तितली पार्क और प्राकृतिक जल कुंड बनाए जाएंगे ताकि विभिन्न प्रजाति के पक्षी और जीव-जंतु वहाँ आश्रय पा सकें। पर्यावरण विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों की देखरेख में इस पूरे क्षेत्र की रूपरेखा तैयार की गई है। अधिकारियों ने बताया कि इस पार्क का उपयोग छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए फील्ड स्टडी और प्रकृति अध्ययन के एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में भी किया जाएगा, जिससे उन्हें व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली और पौधों की जियो-टैगिंग
रोपे गए हर एक पौधे की उत्तरजीविता (survival rate) सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय ने एक अनूठी पहल की है जिसके तहत सभी पौधों की जियो-टैगिंग की जा रही है। इसके माध्यम से मोबाइल ऐप के जरिए प्रत्येक पौधे की वृद्धि और स्वास्थ्य पर नजर रखी जाएगी। साथ ही, पानी की बचत के लिए इस पूरे हरित क्षेत्र में स्वचालित ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की जा रही है जो सौर ऊर्जा से संचालित होगी। छात्रों के विभिन्न क्लबों को अलग-अलग ब्लॉकों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है जिससे उनमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। आज के इस सफल आयोजन से पूरे रोहतक शहर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक संदेश गया है और नागरिकों ने भी अपने आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाने की प्रेरणा ली है।