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संघ का वैश्विक संवाद: शताब्दी वर्ष के जश्न के बीच अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के दौरे पर निकलेंगे मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत जल्द ही अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना होने वाले हैं। संगठन के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वे वहां प्रवासी भारतीयों से सीधा संवाद करेंगे।

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Kantap News डेस्क
11 अग 2026, 14:49
संघ का वैश्विक संवाद: शताब्दी वर्ष के जश्न के बीच अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के दौरे पर निकलेंगे मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के गौरवशाली शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इस ऐतिहासिक अवसर को दुनिया भर में रह रहे भारतीयों तक पहुंचाने के लिए सरसंघचालक मोहन भागवत एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय दौरे की शुरुआत करने जा रहे हैं। अपने इस विदेश दौरे के दौरान वे अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा जैसे प्रमुख देशों का दौरा करेंगे और वहां विभिन्न सांस्कृतिक तथा बौद्धिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी देशों में बसे प्रवासी भारतीयों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखना और संघ के सेवा कार्यों तथा वैचारिक दृष्टि के बारे में विस्तार से चर्चा करना है।

प्रवासी भारतीयों से संवाद और वैचारिक आदान-प्रदान

विदेश यात्रा के दौरान मोहन भागवत विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों और भारतीय मूल के प्रतिष्ठित नागरिकों के साथ खुली बैठकों में शामिल होंगे। संघ के सूत्रों के अनुसार, आज का प्रवासी भारतीय समुदाय भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है, और संघ चाहता है कि देश के विकास में उनकी सहभागिता और अधिक मजबूत हो। इस दौरान वे भारत की प्राचीन जीवन शैली, पारिवारिक मूल्यों और वैश्विक शांति के संदेश को भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रखेंगे, जिसे लेकर विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

सुरक्षा और संगठनात्मक तैयारियां

संघ प्रमुख के इस हाई-प्रोफाइल विदेशी दौरे को लेकर संबंधित देशों में मौजूद स्वयंसेवकों और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी कार्यक्रमों के स्थलों का चयन और प्रबंधन अंतिम चरण में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ का यह वैश्विक अभियान न केवल सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सॉफ्ट पावर को और अधिक सुदृढ़ करने में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
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