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उच्च शिक्षा में बड़े सुधार की ओर कदम: दिल्ली कैबिनेट ने 'निजी विश्वविद्यालय विधेयक' के मसौदे को दी मंजूरी

दिल्ली में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना और निजी विश्वविद्यालयों की फीस व मानकों को विनियमित करने के लिए दिल्ली कैबिनेट ने नए विधेयक के मसौदे को अपनी स्वीकृति दे दी है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 18:13
उच्च शिक्षा में बड़े सुधार की ओर कदम: दिल्ली कैबिनेट ने 'निजी विश्वविद्यालय विधेयक' के मसौदे को दी मंजूरी
राजधानी दिल्ली को वैश्विक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाने और छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा के विकल्प प्रदान करने के लिए दिल्ली कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 'दिल्ली निजी विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) विधेयक' के मसौदे को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। यह विधेयक आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखा जाएगा। इस कानून का मुख्य उद्देश्य राजधानी में प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए एक पारदर्शी और सुगम कानूनी ढांचा तैयार करना है, जिससे दिल्ली के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों या विदेश न जाना पड़े।

फीस विनियमन और शैक्षणिक गुणवत्ता पर सख्त नियंत्रण

प्रस्तावित विधेयक में छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा और अनियंत्रित फीस वृद्धि पर लगाम कसने के लिए कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। कानून के अनुसार, दिल्ली में स्थापित होने वाले सभी निजी विश्वविद्यालयों को एक स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority) के अधीन लाया जाएगा, जो उनकी फीस संरचना, प्रवेश प्रक्रिया और शिक्षक-छात्र अनुपात की नियमित समीक्षा करेगा। इसके अलावा, राज्य के कमजोर वर्ग के मेधावी छात्रों के लिए इन निजी विश्वविद्यालयों में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने और उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान करने का अनिवार्य प्रावधान किया गया है, ताकि आर्थिक रूप से पिछड़े छात्र भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।

अनुसंधान और वैश्विक रैंकिंग को प्रोत्साहन

शिक्षा विशेषज्ञों ने दिल्ली सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि इससे दिल्ली में शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अनुसंधान तथा नवाचार को नया प्रोत्साहन मिलेगा। नए विधेयक में विश्वविद्यालयों के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से उच्च ग्रेडिंग प्राप्त करना और आधुनिक लैब्स स्थापित करना अनिवार्य किया गया है। सरकार का मानना है कि इस नीतिगत सुधार से दिल्ली न केवल प्रशासनिक और व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र रहेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में देश-विदेश के लाखों शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का पहला पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरेगी।
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