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आर्थिक छलांग: भारत बनेगा दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था, KIEP का बड़ा बयान

वैश्विक संस्थाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के अनुमान को उन्नत किया है। कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी के दक्षिण एशिया प्रमुख ने देश के हालिया प्रदर्शन की सराहना की है। वर्ष 2030 के आसपास देश के वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना जताई गई है।

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Ankit Yadav
17 अक्ट 2026, 16:33
आर्थिक छलांग: भारत बनेगा दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था, KIEP का बड़ा बयान

अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान संस्थानों द्वारा विकास दर में संशोधन

विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और एशियाई विकास बैंक सहित दुनिया के तमाम बड़े पूर्वानुमान लगाने वाले संगठनों ने हाल ही में देश की आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर बड़ा बदलाव किया है। इन सभी प्रमुख संस्थानों ने इस साल तथा आने वाले वर्ष के लिए विकास अनुमानों को ऊपर उठाते हुए सात प्रतिशत के आंकड़े से अधिक कर दिया है। इस संदर्भ में कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी के दक्षिण एशिया प्रमुख क्यूंगहून किम ने अपने विचार रखे हैं। उन्होंने इस प्रदर्शन को बेहद असाधारण करार देते हुए कहा है कि देश की मौजूदा आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए यह आंकलन और अधिक महत्वपूर्ण बन जाता है। महामारी के दौर में जब पांच दशमलव आठ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, तब वर्ष 2021 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने नौ दशमलव सात प्रतिशत की मजबूत वापसी की थी। इसके बाद के चार वर्षों में प्रत्येक वर्ष सात प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने तिमाही सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े सामने आने के बाद अपने पूर्व के अनुमानों में बार-बार सकारात्मक सुधार किया है। इस विशेष समूह में क्यूंगहून किम स्वयं भी शामिल हैं जिन्होंने निरंतर हो रही इस वृद्धि की सराहना की है।

लगातार पांच वर्षों तक मजबूत आर्थिक गति का रिकॉर्ड

दक्षिण एशिया के प्रमुख क्यूंगहून किम ने जानकारी दी है कि इस प्रकार लगातार पांच वर्षों की अवधि के दौरान सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी वर्ष 2003 से 2007 के उस विशिष्ट कालखंड में देखने को मिली थी। उस समय ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में देश ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया था। यदि आज के समय के मौजूदा पूर्वानुमान पूरी तरह सटीक साबित होते हैं, तो देश उस पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ने में कामयाब हो जाएगा। वर्ष 2021 से 2025 के बीच की अवधि में औसत वार्षिक वृद्धि दर सात दशमलव आठ तीन प्रतिशत दर्ज की गई है। यदि वर्ष 1960 के बाद के तमाम आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए, तो यह पांच वर्षों का दूसरा सबसे बड़ा औसत बनता है। यह ठीक उस बड़े आंकड़े के पीछे खड़ा है जो वर्ष 2003 से 2007 के दौरान सात दशमलव आठ नौ प्रतिशत के रूप में दर्ज किया गया था। इतनी लंबी समयावधि तक इस तरह की तेज गति को लगातार बनाए रखना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। आज के समय में देश का परिचालन एक पूरी तरह से भिन्न और बहुत ऊंचे स्तर पर हो रहा है। वर्ष 2007 में देश का सकल घरेलू उत्पाद एक ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा सा ही अधिक हुआ करता था।

दो ट्रिलियन से अधिक का विस्तार और वर्ष 2030 का लक्ष्य

आज के समय में देश का सकल घरेलू उत्पाद बढ़कर लगभग चार ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है। यही मुख्य कारण है कि अब सात प्रतिशत की वही विकास दर कहीं अधिक बड़े पैमाने पर होने वाले आर्थिक विस्तार को दर्शाती है। क्यूंगहून किम द्वारा किए गए आकलन के अनुसार लगभग वर्ष 2030 के आसपास यह राष्ट्र दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए यह भी स्वीकार किया है कि इस सफर में अभी भी कई प्रकार की चुनौतियां और बाधाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद चौदह करोड़ से अधिक आबादी वाले इस विशाल देश का ऐसा शानदार आर्थिक प्रदर्शन निश्चित तौर पर जश्न मनाने योग्य है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई है कि जब आने वाले समय में अगली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े जारी किए जाएंगे। उस अवसर पर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के अर्थशास्त्री और वे स्वयं भी अपने अनुमानों में कुछ और दशमलव अंक जोड़ रहे होंगे। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यह प्रोटेस्ट नहीं रुका तो इस घाटे में कई गुना और अधिक वृद्धि हो सकती है।

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