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यूरोपीय अशांति: फ्रांस और बेल्जियम में भड़की हिंसा, पुलिस ने की गिरफ्तारियां

यूरोप के कई देशों में नागरिकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। फ्रांस और बेल्जियम समेत अन्य जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी भिड़ंत हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं।

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Ankit Yadav
18 अक्ट 2026, 12:14
यूरोपीय अशांति: फ्रांस और बेल्जियम में भड़की हिंसा, पुलिस ने की गिरफ्तारियां

फ्रांस और बेल्जियम में व्यापक पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन

यूरोपीय राष्ट्र फ्रांस के कई महानगरों में सार्वजनिक सेवाओं के स्तर में गिरावट और आसमान छूती महंगाई के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों की सबसे बड़ी हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। पेरिस, मार्सिले, रेनेस, टूलूज तथा एंगर्स जैसे प्रमुख शहरों की सड़कों पर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी उतर आए। इन इलाकों में मुखौटे पहने कुछ लोगों द्वारा तोड़फोड़ करने की कोशिश की गई, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और आगजनी जैसी घटनाएं अंजाम दी गईं। इसके अलावा सत्ता के प्रमुख केंद्रों और समाचार संस्थानों को भी निशाना बनाया गया। ल्योन शहर के एक पर्यटक कार्यालय में आग लगाने की घटना भी दर्ज की गई है। सरकारी तंत्र के अनुसार इन वारदातों के पीछे कुछ खास राजनीतिक संगठनों का हाथ बताया जा रहा है। पेरिस की सड़कों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और चैंप्स-एलिसीज तथा आर्क डी ट्रायंफ जैसी प्रसिद्ध जगहों पर पुलिस बल की भारी तैनाती देखी गई। इन प्रदर्शनकारियों ने विशिष्ट जैकेटें पहनी हुई थीं और यातायात को बाधित कर दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने पिछले वर्षों में हुए पुराने आंदोलनों की याद ताजा कर दी है, जिससे प्रशासनिक अमला पूरी तरह सतर्क हो गया है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

गिरफ्तारी का आंकड़ा और नेताओं की सख्त प्रतिक्रियाएं

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस देशव्यापी अशांति के दौरान कुल 272 लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया है। देश के राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस प्रकार के उपद्रव के लिए राष्ट्र के भीतर कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। प्रधानमंत्री ने भी इंटरनेट मीडिया के एक मंच के माध्यम से अपनी बात रखते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया है कि किसी भी सूरत में ताकत के बल पर राजनीतिक दबाव नहीं बनाने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कृत्यों से देश का मनोबल कमजोर नहीं पड़ेगा। दूसरी ओर बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में भी शनिवार के दिन बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए और उन्होंने विरोध दर्ज कराया। बेल्जियम के शिक्षण संस्थानों से जुड़े छात्र संगठनों का मुख्य तौर पर यह कहना था कि वे पढ़ाई के बढ़ते खर्चों और ऐसे बदलावों का विरोध कर रहे हैं जिनसे उच्च शिक्षा प्राप्त करना और अधिक कठिन हो सकता है। प्रदर्शनकारियों की भीड़ और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पें हुईं, जिन्हें काबू में करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया। इस दौरान सुरक्षाबलों द्वारा रबर की गोलियां दागे जाने की बात भी सामने आई है। बेल्जियम के एक मंत्री ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह अब केवल साधारण विरोध नहीं रह गया है और शांति कायम करने के लिए हर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

पुर्तगाल में आवास संकट और व्यापक विरोध रैलियों का दौर

केवल फ्रांस और बेल्जियम ही नहीं बल्कि पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी आम नागरिकों ने आवास और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की बढ़ती कीमतों के विरोध में बड़े पैमाने पर मार्च निकाला। देश के भीतर पिछले कई वर्षों से मकानों के दामों में भारी उछाल आया है और आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2017 से अब तक घरों की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं, जिसके कारण गंभीर आवासीय संकट पैदा हो गया है। इस विशाल रैली का आयोजन देश के एक प्रमुख श्रमिक संगठन द्वारा किया गया था, जिसके आह्वान पर हजारों की संख्या में लोग राजधानी के मुख्य मार्गों पर जमा हुए और अपनी आवाज बुलंद की। फ्रांस में इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले महीने राजधानी के कुछ विद्यालयों से हुई थी, जहां अध्यापकों की भारी कमी और आधारभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर विद्यार्थियों में असंतोष पनपा था। समय के साथ यह नाराजगी एक विशाल जन आंदोलन का रूप ले चुकी है जो अंततः आर्थिक असमानता, सरकारी तिजोरी से होने वाले खर्च और आम जनजीवन के स्तर जैसे गंभीर विषयों पर केंद्रित हो गई है। आगामी चुनावों से कुछ महीने पहले भड़की इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और सरकार के सामने इन समस्याओं का समाधान खोजना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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