चार देशों में आए भूकंप
शुक्रवार 23 अक्टूबर 2026 की सुबह को भूकंप के तेज और हल्के झटकों ने लोगों के मन में खौफ पैदा कर दिया। कुल तीन घंटे और बाईस मिनट के छोटे से अंतराल के भीतर चार देशों में धरती लगातार हिलती रही। इन प्रभावित देशों की सूची में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन के नाम शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में दर्ज किए गए भूकंपों की तीव्रता दो दशमलव सात से लेकर चार दशमलव नौ के बीच मापी गई। सबसे पहले भारत के भीतर धरती में हलचल महसूस की गई जिसके तुरंत बाद पड़ोसी देशों में भी यही स्थिति देखने को मिली। सुबह के वक्त अचानक आए इन झटकों के कारण लोग बुरी तरह डर गए और अपने घरों से बाहर निकल आए। तड़के शुरू हुआ यह प्राकृतिक घटनाक्रम कुछ ही घंटों में कई सीमाओं को पार कर गया। इन झटकों की वजह से सुबह की शुरुआत काफी खौफनाक रही और हर तरफ इसी घटना की चर्चा होने लगी। किसी भी स्थान पर एक साथ कई देशों में इस तरह धरती का कांपना चिंता का बड़ा विषय बन गया। वैज्ञानिक और आम नागरिक दोनों ही इस पूरी स्थिति पर अपनी नजर बनाए हुए थे।
विभिन्न देशों में तीव्रता और समय
भारत में शुक्रवार तड़के दो बजकर तैंतालीस मिनट पर हिमाचल प्रदेश के शिमला के पास धरती हिली थी। इस भूकंप की तीव्रता केवल दो दशमलव सात थी और इसका केंद्र जमीन से करीब पांच किलोमीटर की गहराई में स्थित था। यह एक बेहद हल्की तीव्रता का झटका था जिससे किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई। इसके बाद पाकिस्तान के अंदर सुबह चार बजकर छप्पन मिनट पर एक और भूकंप दर्ज किया गया। पाकिस्तान में आए इस भूकंप की तीव्रता चार दशमलव नौ थी जो इन चारों देशों में दर्ज की गई तीव्रता में सबसे अधिक थी। इस भूगर्भीय हलचल का केंद्र जमीन के नीचे लगभग पंद्रह किलोमीटर की गहराई पर था। इसके ठीक बाद अफगानिस्तान में सुबह पांच बजकर चौवन मिनट पर धरती फिर से कांप उठी। अफगानिस्तान में रिकॉर्ड किए गए इस झटके की तीव्रता चार दशमलव एक थी और इसका केंद्र जमीन से करीब पच्चीस किलोमीटर नीचे था। इसके बाद चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी सुबह छह बजकर पांच मिनट पर चार दशमलव चार तीव्रता का झटका महसूस किया गया। इस प्रकार एक के बाद एक देशों में आंकड़े दर्ज होते गए और लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हो गए।
तिब्बत में पिछली तबाही का असर
चीन के तिब्बत क्षेत्र में सुबह के वक्त आए इस झटके को लेकर चिंता का माहौल बहुत ज्यादा गहरा गया था। इसकी मुख्य वजह यह थी कि ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार की शाम को इसी इलाके में सात तीव्रता का एक बहुत बड़ा भूकंप आया था। उस भयंकर आपदा के दौरान सोलह बेकसूर लोगों की जान चली गई थी और भारी तबाही हुई थी। शुक्रवार के दिन उसी क्षेत्र में दोबारा झटके महसूस किए जाने से लोगों की पुरानी दहशत फिर से ताजा हो गई। जानकारों के अनुसार बड़े भूकंप के आने के बाद जमीन के अंदरूनी हिस्सों में मौजूद चट्टानों में हलचल लगातार जारी रहती है। इस अंदरूनी हलचल के कारण ही बार-बार झटके आते रहते हैं जिन्हें भूविज्ञान की भाषा में आफ्टरशॉक कहा जाता है। यह आफ्टरशॉक किसी भी बड़े हादसे के गुजर जाने के बाद भी काफी समय तक महसूस किए जा सकते हैं। इस प्रकार की स्थितियों में लोगों को हमेशा सतर्क रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि खतरा पूरी तरह टलता नहीं है। पिछले दिन हुई मौतों के जख्म अभी हरे ही थे कि शुक्रवार को आए इन नए झटकों ने प्रशासन और आम जनता की नींद उड़ा दी।