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बड़ा फैसला: आईएएस दिव्या मित्तल ने इस्तीफे को लेकर तोड़ी चुप्पी, कहा- यह करियर का एक अध्याय है

आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने हालिया इस्तीफे को लेकर एक खास बातचीत में कई बड़ी बातें साझा की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके इस कदम के पीछे कोई भी तात्कालिक या अचानक आया ट्रिगर पॉइंट नहीं था।

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Ankit Yadav
31 अग 2026, 12:19
बड़ा फैसला: आईएएस दिव्या मित्तल ने इस्तीफे को लेकर तोड़ी चुप्पी, कहा- यह करियर का एक अध्याय है
भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस की प्रतिष्ठित नौकरी से अलग होने वाली अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने फैसले के पीछे की वजहों पर खुलकर बात की है। प्रशासनिक हलकों में उनके इस अचानक लिए गए निर्णय को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिसके बाद उन्होंने खुद सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने एक विशेष साक्षात्कार में बताया कि इस निर्णय के पीछे कोई विशेष या अचानक उभरा हुआ दबाव नहीं था, बल्कि यह उनके जीवन और करियर के सफर का एक सामान्य पड़ाव है जिसे उन्होंने सोच-समझकर अपनाया है।

नौकरी को माना जिंदगी का एक पन्ना

अपने इस बड़े और अप्रत्याशित कदम के बारे में विस्तार से बताते हुए पूर्व नौकरशाह ने कहा कि प्रशासनिक सेवा उनके संपूर्ण जीवन का एक हिस्सा भर है, पूरा जीवन नहीं। उन्होंने इसे एक किताब के केवल एक अध्याय की तरह देखा है, जो अब पूरा हो चुका है। उनके अनुसार, जीवन में आगे बढ़ने के लिए नए रास्तों को तलाशना और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का आकलन करना बेहद जरूरी होता है। इतने लंबे समय तक सिविल सेवा में अपनी सेवाएं देने के बाद, अब उन्होंने अपने जीवन के कैनवास को और अधिक विस्तृत करने का निर्णय लिया है ताकि वे नए और अलग आयामों को छू सकें।

भविष्य की योजनाओं पर सस्पेंस बरकरार

हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे किसी तरह के विवाद या मतभेद से इनकार किया है, लेकिन भविष्य में उनके कदम किस दिशा में उठेंगे, इसे लेकर अभी भी लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। आमतौर पर देखा गया है कि सिविल सेवा छोड़ने के बाद अधिकारी या तो सामाजिक उद्यमिता, राजनीति, या फिर निजी क्षेत्र के बड़े उपक्रमों का रुख करते हैं। दिव्या मित्तल के मामले में भी यह कयास लगाया जा रहा है कि वे आने वाले समय में राष्ट्र निर्माण या सार्वजनिक कल्याण के किसी अन्य वैकल्पिक माध्यम से जुड़ी रहेंगी। उनके इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि एक सक्षम नौकरशाह किस तरह अपनी शर्तों पर करियर को नया मोड़ दे सकता है। विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक मंचों पर उनके इस बयान की खासी चर्चा हो रही है। लोग उनके द्वारा लिए गए इस साहसिक निर्णय की सराहना भी कर रहे हैं और आलोचना भी, लेकिन इन सबके बीच उनका यह स्पष्टीकरण कि यह महज एक अध्याय है, युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बन गया है। प्रशासनिक नौकरी की चमक-धमक से बाहर आकर अपने जीवन को नए सिरे से परिभाषित करने का उनका यह अंदाज निश्चित रूप से आने वाले दिनों में देश के अन्य युवाओं और महत्वाकांक्षी सिविल सेवकों को भी प्रेरित करेगा, जो करियर की एक ही लकीर के फकीर बनकर नहीं रहना चाहते बल्कि जीवन के हर पड़ाव पर नए अनुभव हासिल करना चाहते हैं।
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