कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
'अरुणाचल बॉर्डर पर भारत और चीन आमने-सामने बने हुए हैं', आईटीबीपी डीजी के बयान पर सियासत गरमाई      सिवान में पटाखा कारोबारी के घर में ब्लास्ट; 7 की मौत की सूचना, 2 घंटे तक होते रहे धमाके      ईरान पर कहर बरपाने को तैयार था इजरायल, मगर ट्रंप ने रोक दिया; किस शर्त पर माने नेतन्याहू      दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की नेहा बोरा की याचिका, 'पीस बॉन्ड' भरने के खिलाफ की थी अपील      PHOTOS: बंगाल की खाड़ी में फिर जागा समुद्री राक्षस, सबको निगलने के लिए है बेताब, IMD ने बताया कब बरपाएगा कह...      राहुल गांधी पर पीएम मोदी के लगातार हमले लेकिन नेहा बोरा-दीपके पर चुप्पी के क्या मायने हैं      MLC Election Live: यूपी में मतदान सुस्त, पटना मे अनंत सिंह के समर्थकों ने की आतिशबाजी, 4 राज्यों में मतदान संपन्न      अमिताभ बच्चन का बंगला उड़ाने की धमकी: दिलजीत दोसांझ को जान से मारने का मेल; 5 दिन पहले टाइगर श्रॉफ पर हुई थ...     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लाइफस्टाइल

पीढ़ीगत अंतराल: राजनीतिक विचारधाराओं के कारण माता-पिता और बच्चों में बढ़ती दूरियां

भारत के शहरी परिवारों में राजनीतिक विचारधाराओं के मतभेद अब घर-परिवार के रिश्तों में दरार की वजह बनने लगे हैं।

X
Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 17:04
पीढ़ीगत अंतराल: राजनीतिक विचारधाराओं के कारण माता-पिता और बच्चों में बढ़ती दूरियां
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और खबरों की अति-उपलब्धता ने हर व्यक्ति की राजनीतिक राय को बहुत मजबूत कर दिया है। स्थिति यह आ गई है कि माता-पिता और उनकी संतान के बीच राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर गंभीर वैचारिक टकराव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक पारिवारिक संवाद की जगह अब तीखी राजनीतिक बहसें ले रही हैं, जिससे कई घरों में भावनात्मक दूरियां बढ़ती जा रही हैं। समाजशास्त्रियों का मानना है कि यह आधुनिक भारतीय परिवार के लिए एक नया और चिंताजनक ट्रेंड है, जो पहले कभी इस रूप में नहीं देखा गया था।

डिनर टेबल की तीखी बहसें

अक्सर यह देखा गया है कि शाम की चाय या रात के खाने के समय होने वाली चर्चाएं कुछ ही मिनटों में उग्र राजनीतिक बहसों में बदल जाती हैं। पुरानी पीढ़ी जहां अपने अनुभवों और पारंपरिक मूल्यों के आधार पर सोचती है, वहीं नई पीढ़ी आधुनिक आख्यानों और सोशल मीडिया के प्रभावों से लैस होकर अपनी बात रखती है। इस वैचारिक असमानता के कारण कई घरों में संवादहीनता की स्थिति पैदा हो रही है। बच्चे अपने माता-पिता के राजनीतिक दृष्टिकोण को रूढ़िवादी मानने लगते हैं, जबकि माता-पिता अपनी संतानों को अतिવાदी या भटके हुए समझने की भूल कर बैठते हैं।

रिश्तों को बचाने की चुनौती

इस बढ़ते अंतराल को पाटने के लिए यह आवश्यक है कि परिवार के सदस्य राजनीति को अपने व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर न रखें। आपसी सम्मान और सहिष्णुता का परिचय देते हुए यह स्वीकार करना होगा कि हर व्यक्ति की अपनी स्वतंत्र सोच हो सकती है। मनोवैज्ञानिकों की सलाह है कि परिवारों में ऐसे विषयों पर बात करते समय संयम बरतना चाहिए ताकि घर का सुकून और प्यार बना रहे। आखिरकार, वैचारिक मतभेद परिवार की आत्मीयता से बड़े नहीं हो सकते।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज