परीक्षा परिणाम में शानदार उपलब्धि
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित सिविल सेवा प्रतियोगिता के नवीनतम परीक्षा परिणाम घोषित किए गए हैं। इन परिणामों में राज्य के महासमुंद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बसना विकासखंड के बड़े साजापाली ग्राम से ताल्लुक रखने वाली मेधावी छात्रा नंदनी साहू ने बाजी मारी है। उन्होंने अपनी काबिलियत के बल पर पूरे प्रांतीय स्तर पर पांचवीं रैंक हासिल करने में बड़ी सफलता पाई है। इस उच्च श्रेणी की प्राप्ति के साथ ही उनका चयन प्रशासनिक सेवा के तहत डिप्टी कलेक्टर के महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पद के लिए कर लिया गया है। मूल रूप से ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखने वाली इस बेटी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने ही गांव के एक सरकारी शिक्षण संस्थान से पूरी की थी। इसके बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए उन्होंने रायपुर शहर का रुख किया और वहां स्थित डिग्री गर्ल्स कॉलेज से अपने स्नातक की पढ़ाई सफलता पूर्वक संपन्न की थी। प्रतियोगी परीक्षाओं के कठिन दौर से गुजरते हुए उन्होंने अपनी इस बड़ी सफलता से पूरे परिवार और अपने गृह जिले का नाम रोशन कर दिखाया है।
कठिन संघर्ष और मां का त्याग
इस बड़ी सफलता के पीछे संघर्षों की एक लंबी और प्रेरणादायक कहानी जुड़ी हुई है। जब यह मेधावी छात्रा बारहवीं कक्षा की पढ़ाई कर रही थी, तब उनके पिता मेघनाथ साहू का निधन हो गया था। उनके पिता एक शिक्षक थे और उनकी गहरी इच्छा थी कि उनकी कोई संतान बड़े पद पर आसीन होकर अफसर बने। पिता के अचानक चले जाने से पूरे परिवार पर दुखों का भारी पहाड़ टूट पड़ा था और घर की सारी जिम्मेदारी मां रामप्यारी साहू के कंधों पर आ गई थी। पांचवीं कक्षा तक पढ़ी हुई मां ने इस विकट परिस्थिति में भी जरा भी हिम्मत नहीं हारी और परिवार को संभालने का जिम्मा उठाया। उन्होंने खेती किसानी का काम किया और अपने दिवंगत पति से मिलने वाली पेंशन के सहारे परिवार का गुजर-बसर किया। आर्थिक तंगी के बावजूद मां ने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई बाधा नहीं आने दी और हर संभव संसाधन जुटाए। वर्ष 2019 के दौरान यह मेधावी बेटी अपनी मां के साथ बिलासपुर शहर आ गई जहां दोनों ने एक किराए के मकान में रहकर जीवन बिताया। परिवार में पांच बहनें और एक छोटा भाई होने के बावजूद सभी ने मिलकर पढ़ाई के लिए पूरा अनुकूल माहौल बनाए रखा और कभी भी उन पर शादी का दबाव नहीं बनाया।
अनुशासित तैयारी और प्रेरणा
सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा में सफलता पाने के लिए इस अभ्यर्थी ने बेहद अनुशासित और व्यवस्थित तरीका अपनाया। शुरुआत में उन्होंने कुछ महीनों तक कोचिंग संस्थान की मदद ली ताकि परीक्षा के पैटर्न और पाठ्यक्रम को ठीक से समझा जा सके। इसके बाद उन्होंने किसी अन्य सहारे के बिना अपने घर पर ही रहकर स्वाध्याय करने का निर्णय लिया और अपनी पूरी ऊर्जा उसी में लगा दी। वह हर दिन सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थीं और दिन के समय भी किताबों के साथ समय बिताना पसंद करती थीं। इस दौरान उन्हें कुछ चरणों में असफलताओं का सामना भी करना पड़ा लेकिन उन्होंने इससे निराश होने के बजाय अपनी गलतियों से सीख ली। अपने लक्ष्य को लेकर इतनी समर्पित थीं कि उन्होंने करीब तीन साल तक सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। परिवार का पूरा सहयोग और उनकी अपनी निरंतर मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में यह मुकाम हासिल कर लिया। उनकी यह प्रेरक यात्रा यह साबित करती है कि पक्का इरादा और अपनों का अटूट भरोसा इंसान को हर मुसीबत से पार पाकर मंजिल तक पहुंचा देता है।