जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित एक सामुदायिक सभागार में आज झारखंड के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से आए पारंपरिक हस्तशिल्प कारीगरों, बुनकरों और महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए एक विशेष डिजिटल साक्षरता और विपणन कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला उद्योग केंद्र और हस्तशिल्प विकास बोर्ड के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कला और उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना था। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कारीगरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर अपने उत्पादों की लिस्टिंग करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए।
झारखंड की पारंपरिक सोहराय पेंटिंग, टेराकोटा शिल्प, ढोकरा मेटल क्राफ्ट और हाथ से बने वस्त्रों के निर्माण से जुड़े सैकड़ों कारीगर इस कार्यशाला का हिस्सा बने। प्रशिक्षकों ने उन्हें बताया कि कैसे वे आकर्षक फोटोग्राफी और सही विवरण के जरिए अपने उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री कई गुना बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही, सरकारी योजनाओं जैसे मुद्रा लोन और पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग को आधुनिक मानकों के अनुरूप ढालने पर विशेष जोर देने की सलाह दी गई।
कार्यशाला के अंत में कई युवा कारीगरों ने उत्साहपूर्वक अपने ऑनलाइन स्टोर और सोशल मीडिया पेज भी बनाए, जिन्हें देखकर प्रशिक्षकों ने उनकी प्रशंसा की। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने घोषणा की कि इस प्रकार की कार्यशालाएं आगे भी ब्लॉक स्तर पर आयोजित की जाएंगी ताकि राज्य का हर हुनरमंद कारीगर तकनीक से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सके। स्थानीय हस्तशिल्प प्रेमियों ने इस प्रयास को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम बताया है।