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केजीएमयू में प्रशासनिक फेरबदल: बाहरी मेडिकल स्टोर से दवा मंगाने के मामले में विभागाध्यक्ष पद से हटीं प्रो-वीसी

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ के नेत्र रोग विभाग में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं और चश्मे लिखने के आरोपों की जांच के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा फैसला लिया है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 17:53
केजीएमयू में प्रशासनिक फेरबदल: बाहरी मेडिकल स्टोर से दवा मंगाने के मामले में विभागाध्यक्ष पद से हटीं प्रो-वीसी
उत्तर प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मरीजों के हितों से जुड़ी एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली है। केजीएमयू के नेत्र रोग (Ophthalmology) विभाग में भर्ती मरीजों को जबरन बाहर के निजी मेडिकल स्टोर और ऑप्टिकल शॉप से महंगी दवाएं और चश्मे खरीदने के लिए मजबूर करने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रो-वाइस चांसलर को नेत्र रोग विभागाध्यक्ष (HoD) के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। कुलपति के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने पाया था कि अस्पताल के जन औषधि केंद्र में दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को बाहर की चुनिंदा दुकानों से सामान खरीदने का दबाव बनाया जा रहा था।

जांच रिपोर्ट में हुआ अनियमितताओं का पर्दाफाश

जांच समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि नेत्र रोग विभाग के ओपीडी और वार्डों में कुछ खास निजी दुकानों के पर्चे बांटे जा रहे थे, जिससे गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था। शासन के सख्त आदेश हैं कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को सभी आवश्यक दवाएं और उपकरण परिसर के भीतर स्थित फार्मेसी से ही मिलने चाहिए। इस नियम के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए केजीएमयू प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया है और मामले में विस्तृत अनुशासनात्मक जांच के आदेश दिए हैं।

निःशुल्क और पारदर्शी चिकित्सा व्यवस्था पर जोर

केजीएमयू प्रशासन के इस कड़े कदम से परिसर में सक्रिय निजी दवा माफिया और अनैतिक सांठगांठ करने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है। विश्वविद्यालय के नए विभागाध्यक्ष ने पदभार संभालते ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सभी डॉक्टरों को केवल जेनेरिक दवाएं और परिसर में उपलब्ध सामग्री ही लिखनी होगी। यदि भविष्य में कोई भी चिकित्सक मरीजों को बाहर से दवाएं या मेडिकल उपकरण खरीदने के लिए बाध्य करता पाया गया, तो उसकी सेवाएं समाप्त करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का लखनऊ और आसपास के जिलों से आने वाले हजारों असहाय मरीजों ने स्वागत किया है।
Tags: lucknow
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