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कृषि विकास: हिसार के हांसी उपमंडल में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आधुनिक फसल प्रबंधन पर किसान संगोष्ठी का हुआ आयोजन

हरियाणा के हिसार जिले के हांसी क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए आज कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने एक दिवसीय व्यावहारिक किसान संगोष्ठी का सफल आयोजन किया।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 15:54
कृषि विकास: हिसार के हांसी उपमंडल में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आधुनिक फसल प्रबंधन पर किसान संगोष्ठी का हुआ आयोजन
हरियाणा के अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराने के लिए आज हिसार जिले के हांसी उपमंडल परिसर में एक बड़ी किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इस संगोष्ठी में भाग लिया और किसानों को कम पानी की खपत वाली फसलों की बुवाई, फसल अवशेष प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के सही उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी समझाया कि रासायनिक खादों का अंधाधुंध प्रयोग करने के बजाय जैविक खेती और नैनो यूरिया का उपयोग करके किस प्रकार लागत को कम किया जा सकता है और अपनी पैदावार को बढ़ाया जा सकता है।

फसल अवशेष प्रबंधन और पराली जलाने से बचाव पर जोर

इस संगोष्ठी का एक मुख्य आकर्षण फसल अवशेषों को बिना जलाए खेत में ही मिलाने वाली आधुनिक मशीनों का लाइव प्रदर्शन रहा। कृषि विभाग के इंजीनियरों ने किसानों को हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया और बताया कि पराली न जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति कैसे सुरक्षित रहती है। किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ खुलकर संवाद किया और अपनी फसलों में लगने वाले कीटों तथा मौसम परिवर्तन से होने वाले नुकसान के बारे में अपने सवाल पूछे जिनका विशेषज्ञों ने संतोषजनक समाधान बताया।

प्रगतिशील किसानों का हुआ विशेष सम्मान

इस अवसर पर हांसी क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसानों को जिन्होंने जल संरक्षण और बागवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है, जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मानित किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए अन्य साथियों को पारंपरिक धान-गेहूं के फसल चक्र से हटकर विविधतापूर्ण खेती अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम के अंत में कृषि अधिकारियों ने किसानों को मौसम आधारित कृषि बीमा योजनाओं की जानकारी दी और उन्हें किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय तुरंत दावा करने की प्रक्रिया समझाई, जिससे किसानों के चेहरे पर संतोष और उम्मीद की नई किरण दिखाई दी।
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