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मछली पालन: इंदौर के सांवेर क्षेत्र में मत्स्य पालकों के लिए आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक पर कार्यशाला

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सांवेर उपमंडल में आज मत्स्य पालन विभाग द्वारा कम जगह में अधिक उत्पादन देने वाली बायोफ्लॉक तकनीक पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 16:27
मछली पालन: इंदौर के सांवेर क्षेत्र में मत्स्य पालकों के लिए आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक पर कार्यशाला
आज सुबह सांवेर के सामुदायिक भवन में आयोजित इस कार्यशाला में आसपास के दर्जनों गांवों से आए प्रगतिशील किसानों और मत्स्य पालकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक तालाब आधारित मछली पालन से हटकर आधुनिक और कम पानी की खपत वाली प्रणालियों को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों ने बताया कि बायोफ्लॉक तकनीक के जरिए बहुत छोटे से टैंक में भी मछलियों का बंपर उत्पादन किया जा सकता है, जिससे किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस तकनीक में पानी की गुणवत्ता को लगातार बनाए रखने के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग किया जाता है, जो जैविक कचरे को प्रोटीन युक्त भोजन में बदल देते हैं। कार्यशाला के दौरान किसानों को टैंक निर्माण से लेकर मछली के बीज डालने और उनके खान-पान के तौर-तरीकों का लाइव प्रदर्शन भी दिखाया गया।

कम लागत और उच्च मुनाफे का नया माध्यम

मत्स्य विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने विस्तार से समझाया कि कैसे कम पूंजी निवेश के साथ ग्रामीण युवा इस व्यवसाय से जुड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि पारंपरिक खेती में अनिश्चित मानसून और कीटों के प्रकोप का जोखिम रहता है, जबकि नियंत्रित वातावरण में होने वाले इस मछली पालन से साल के बारह महीने नियमित आय सुनिश्चित की जा सकती है। कार्यशाला में मौजूद कई युवाओं ने इस नई तकनीक को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई और बैंक ऋण व सरकारी अनुदान की प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। कृषि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार के स्टार्टअप ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण और संदेह निवारण

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एक विशेष प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों ने अपने तकनीकी संशय विशेषज्ञों के सामने रखे। पानी के पीएच मान को नियंत्रित करने से लेकर मछली के रोगों की रोकथाम तक हर विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में, सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और उन्हें अपने खेतों या परिसरों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में छोटे टैंक स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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