हरियाणा के पंचकूला शहर में हस्तकला और पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज सेक्टर 5 के विशाल प्रदर्शनी मैदान में एक भव्य हथकरघा और हस्तशिल्प मेले का शुभारंभ किया गया। जिला प्रशासन और राज्य हस्तशिल्प विकास निगम के सहयोग से आयोजित इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों कारीगर, बुनकर और मूर्तिकार अपने अनूठे उत्पादों के साथ हिस्सा ले रहे हैं। इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण हरियाणा की प्रसिद्ध फुलकारी कढ़ाई, पानीपत के हस्तनिर्मित कालीन, राजस्थान के ब्लॉक प्रिंटेड वस्त्र, और दक्षिण भारत के पारंपरिक सिल्क वस्त्र हैं, जिन्हें देखने और खरीदने के लिए पहले ही दिन से शहरवासियों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा
इस मेले के आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' के आह्वान को धरातल पर उतारना और छोटे ग्रामीण कारीगरों को बिचौलियों के बिना सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच प्रदान करना है। मेले में आने वाले लोग न केवल पारंपरिक वस्त्रों और साड़ियों की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि लकड़ी के प्राचीन फर्नीचर, पीतल के बर्तन, और हाथ से बने मिट्टी के बर्तनों की भी जमकर खरीद कर रहे हैं। इसके अलावा, मेले के फूड जोन में हरियाणा की पारंपरिक बाजरे की रोटी, सरसों का साग, और विभिन्न राज्यों के लजीज व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं, जो आगंतुकों के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी शामें
आयोजकों ने बताया कि इस दस दिवसीय मेले के दौरान हर शाम देश के जाने-माने लोक कलाकारों द्वारा हरियाणवी रागनियों, फाग नृत्य और शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। सुरक्षा और पार्किंग के लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि आने वाले आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकार के आयोजनों को शहर की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है और बड़ी संख्या में अपने परिवारों के साथ मेले का आनंद उठाने पहुंच रहे हैं।