बिहार की लोक कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली मिथिला पेंटिंग के संरक्षण और संवर्धन के लिए आज पटना में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जिलों से आए कला प्रेमियों, स्कूली छात्रों और युवा कलाकारों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। वरिष्ठ कलाकारों ने प्रतिभागियों को प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने और पारंपरिक प्रतीकों, रेखाओं और विषयों के माध्यम से कैनवास पर अपनी कला उकेरने के गुर सिखाए। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और इस प्राचीन कला को आधुनिक समय में भी जीवंत बनाए रखना है।
लोक कला को मिलेगा नया व्यावसायिक आयाम
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार युवा कलाकार मिथिला पेंटिंग को केवल कागज या दीवारों तक सीमित न रखकर फैशन डिजाइनिंग, होम डेकोर और हस्तशिल्प उत्पादों में उपयोग कर सकते हैं। इससे न केवल कलाकारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि बिहार की संस्कृति का प्रचार-प्रसार भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगा। कला एवं शिल्प महाविद्यालय के निदेशक ने कहा कि ऐसे आयोजनों से छात्रों की रचनात्मकता को सही दिशा मिलती है और उन्हें अपनी सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व महसूस होता है। प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने इस कार्यशाला से बहुत कुछ नया सीखा है जो भविष्य में उनके लिए मददगार साबित होगा।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए और उनके द्वारा बनाई गई उत्कृष्ट कलाकृतियों की एक छोटी प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग पहुंचे। कला प्रेमियों ने मांग की है कि ऐसे प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन नियमित रूप से किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक युवा इस महान परंपरा से जुड़ सकें और अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें।