छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बाहरी क्षेत्र में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आज जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय राज्य स्तरीय किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में आसपास के दर्जनों गांवों से आए प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया और कृषि वैज्ञानिकों से प्राकृतिक खेती, केंचुआ खाद निर्माण, और नीम आधारित कीटनाशकों के प्रयोग की बारीकियां सीखीं। विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार रासायनिक खादों के उपयोग से न केवल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। जैविक खेती अपनाने से न केवल उत्पादन लागत कम होती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और बाजार में उसकी कीमत भी बेहतर मिलती है।
मिट्टी की जांच और उन्नत बीजों का वितरण
कार्यशाला के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य कार्ड के महत्व को समझाया और किसानों की मांग पर उनके खेतों से लाई गई मिट्टी के नमूनों की मुफ्त जांच भी की। इसके अलावा, कई किसानों को धान, दलहन और तिलहन की उन्नत जैविक किस्मों के बीज भी वितरित किए गए। किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पिछले कुछ सत्रों में पारंपरिक खेती के साथ जैविक तरीकों का इस्तेमाल किया है जिसके परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सरकार जैविक खेती करने वाले किसानों को विशेष अनुदान और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है ताकि छत्तीसगढ़ को जैविक कृषि का एक प्रमुख केंद्र बनाया जा सके। शिविर के अंत में किसानों के सवालों के जवाब दिए गए और उन्हें जैविक उत्पादों की पैकेजिंग और विपणन (मार्केटिंग) के आधुनिक तरीकों से भी अवगत कराया गया।