धुरंधर के गाने पर मोदी की एंट्री, रैंप पर चले: जेन-जी संवाद में राहुल पर तंज- झूठ की गूंज से भटकाने वाले हर...
BRICS से ठीक पहले मोदी-पुतिन की मुलाकात, 11 सितंबर को दिल्ली में होगी अहम बैठक, क्या होगा एजेंडा?
फ़्रांस: हिंदू समूह के दौरे के बाद एफ़िल टावर के कर्मचारियों ने नाराज़ होकर क्यों कर दी हड़ताल, जानें पूरा मामला
मणिपुरी म्यूज़िशियन की दिल्ली में पीट-पीटकर हत्या के आरोप में आठ गिरफ़्तार
कुआं या कुछ और! सहारनपुर में मस्जिद के नीचे मिला लखौरी ईंटों से बना ढांचा, ASI ने क्या बताया
PM मोदी ने की NDA की मीटिंग? कौन पहुंचा; कैबिनेट फेरबदल की अटकलें फिर तेज
PM मोदी के कार्यक्रम से पहले अंबानी कल्चरल सेंटर से 2 संदिग्ध हिरासत में, PMO की फर्जी ID और बंदूक बरामद
रेलवे ने दशहरा-दिवाली पर यात्रियों को दी राहत! ट्रेन के ट्रिप बढ़े, एक्स्ट्रा कोच भी जुड़ेगा
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
स्थानीय से वैश्विक: उत्तराखंड के पारंपरिक गढ़वाली आभूषणों की बढ़ रही है धूम, सीएम धामी ने प्रदर्शनी में की सराहना
उत्तराखंड के पारंपरिक गढ़वाली आभूषण अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वैश्विक पहचान बना रहे हैं। सर्राफा मंडल द्वारा आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन आभूषणों की कलाकारी और सांस्कृतिक महत्व की जमकर सराहना की है।
A
Ankit Yadav
08 सित 2026, 16:17
उत्तराखंड की संस्कृति और पारंपरिक धरोहर की गूंज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। राज्य के पारंपरिक आभूषण, जिन्हें मुख्य रूप से गढ़वाली और कुमाऊँनी संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है, ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। हाल ही में आयोजित एक भव्य सर्राफा मंडल की प्रदर्शनी के दौरान इन कलाकृतियों को एक विशेष मंच प्रदान किया गया, जहां राज्य की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और पारंपरिक आभूषणों के वैश्विक विस्तार पर प्रसन्नता व्यक्त की।
सांस्कृतिक धरोहर का वैश्विक प्रसार
पारंपरिक गढ़वाली आभूषण अपनी विशिष्ट बनावट, बेहतरीन शिल्प कला और अद्वितीय डिजाइनों के लिए जाने जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से ये गहने पहाड़ों की महिलाओं के श्रृंगार का मुख्य हिस्सा रहे हैं, जिनमें हंसुली, पौंझी, बुलाक और गासु जैसी चीजें प्रमुख हैं। समय के साथ इन कलाओं को आधुनिक फैशन के अनुकूल ढाला गया है, जिससे देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। सर्राफा मंडल की इस प्रदर्शनी ने स्थानीय कारीगरों को एक ऐसा बेहतरीन मंच दिया है, जहां वे अपनी सदियों पुरानी कला को वैश्विक ग्राहकों के सामने प्रदर्शित कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदर्शनी के दौरान कारीगरों की मेहनत और उनकी कला की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय पारंपरिक उद्योगों और कलाओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। जब हमारे पारंपरिक जेवर वैश्विक पटल पर अपनी चमक बिखेरते हैं, तो यह न केवल हमारे आभूषण निर्माताओं के लिए गर्व का विषय होता है, बल्कि पूरे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी एक नया आयाम मिलता है। सरकार का यह प्रयास है कि पारंपरिक हुनर से जुड़े हर एक कारीगर को उचित बाजार और आर्थिक लाभ मिले ताकि उनकी पीढ़ियों पुरानी कला जीवित रह सके।
आने वाले दिनों में इस तरह के आयोजनों के माध्यम से राज्य के हस्तशिल्प और आभूषण उद्योग को और अधिक गति मिलने की पूरी उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और देश-विदेश के पर्यटक व खरीदार उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति से परिचित हो सकेंगे। सर्राफा मंडल की यह पहल और सरकार का समर्थन मिलकर पहाड़ी आभूषणों को ग्लोबल मार्केट में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रहा है।