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लोकल टू ग्लोबल: गढ़वाली नथ से गुलोबंद तक उत्तराखंड के पारंपरिक गहनों को मिलेगा वैश्विक मंच
उत्तराखंड के पारंपरिक आभूषणों जैसे गढ़वाली नथ और गुलोबंद को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने एक बड़ी पहल की है, जिससे स्थानीय कला को बढ़ावा मिलेगा।
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Ankit Yadav
08 सित 2026, 13:22
उत्तराखंड की संस्कृति, पहनावा और पारंपरिक आभूषणों की अपनी एक अनूठी और समृद्ध विरासत रही है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है। पर्वतीय क्षेत्रों की इन कलाओं और शिल्पकलाओं को देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार लगातार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब राज्य के पारंपरिक गहनों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों की कला को एक नई उड़ान मिल सके।
पारंपरिक गहनों की वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि उत्तराखंड के पारंपरिक आभूषणों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया जाए। गढ़वाली नथ, गुलोबंद, और अन्य पारंपरिक गहने न केवल पहाड़ी संस्कृति की पहचान हैं, बल्कि ये महिलाओं के श्रृंगार का एक अहम हिस्सा भी माने जाते हैं। जब ये पारंपरिक आभूषण वैश्विक मंच पर पहुंचेंगे, तो इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी मांग बढ़ेगी, बल्कि राज्य की कला को भी एक अलग पहचान मिलेगी।
उत्तराखंड सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य 'लोकल टू ग्लोबल' के विजन को साकार करना है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले इन अनमोल गहनों को आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन के जरिए वैश्विक खरीदारों तक पहुंचाया जाएगा। इस प्रक्रिया से राज्य के पारंपरिक स्वर्णकारों और आभूषण निर्माताओं को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिलेगा। जब स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर सराहना मिलेगी, तो रोजगार के नए अवसर भी स्वतः सृजित होंगे।
शिल्पकारों और कारीगरों को मिलेगा प्रोत्साहन
राज्य के पारंपरिक शिल्पकारों की कला को संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें बाजार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। पारंपरिक गढ़वाली नथ और गुलोबंद जैसे आभूषणों की बनावट बेहद बारीक और आकर्षक होती है, जिसे तैयार करने में कारीगरों की वर्षों की मेहनत लगती है। वैश्विक मंच मिलने से इन कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा और युवा पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला से जुड़ने के लिए प्रेरित होगी।
आने वाले समय में इस दिशा में कई और कदम उठाए जाने की उम्मीद है, जिससे उत्तराखंड के सांस्कृतिक उत्पादों को एक मजबूत वैश्विक पहचान मिल सके। सरकार के इन प्रयासों से न केवल पहाड़ी संस्कृति का दायरा पूरी दुनिया तक फैलेगा, बल्कि राज्य की आर्थिकी को भी एक नया संबल प्राप्त होगा। स्थानीय जनता और आभूषण निर्माताओं ने भी सरकार की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।