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तहसीलों में ठप कामकाज: डिजिटल व्यवस्था के विरोध में हरियाणा के कर्मचारी हड़ताल पर उतरे

हरियाणा भर की तहसीलों में प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह से बाधित हो गया है क्योंकि कर्मचारी नए डिजिटल सिस्टम के विरोध में अचानक हड़ताल पर चले गए हैं।

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Ankit Yadav
23 अग 2026, 12:09
तहसीलों में ठप कामकाज: डिजिटल व्यवस्था के विरोध में हरियाणा के कर्मचारी हड़ताल पर उतरे
हरियाणा राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित तहसीलों का कामकाज पूरी तरह से चरमरा गया है। पिछले कुछ दिनों से प्रशासनिक कार्यालयों में चल रहे घटनाक्रम के बीच अब कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए हड़ताल का रास्ता चुना है। इस हड़ताल की मुख्य वजह शासन द्वारा लागू की जा रही नई डिजिटल प्रणालियां और कंप्यूटरीकृत व्यवस्थाएं हैं, जिनका कर्मचारी संघ लगातार विरोध कर रहे हैं। इस अचानक हुए काम ठप होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

डिजिटल बदलाव पर गहराता विवाद

कर्मचारियों का तर्क है कि नई डिजिटल प्रणालियों को बिना उचित बुनियादी ढांचे और पर्याप्त प्रशिक्षण के थोपा जा रहा है। उनका कहना है कि इस तकनीकी बदलाव से उनके दैनिक कार्यों पर अनुचित दबाव बढ़ रहा है और तकनीकी खामियों के कारण जनता के कामों में भी अनावश्यक देरी हो रही है। दूसरी ओर, सरकारी तंत्र इस आधुनिकीकरण को प्रशासन में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को कम करने की दिशा में एक बेहद जरूरी कदम बता रहा है। दोनों पक्षों के बीच इस वैचारिक और प्रशासनिक गतिरोध का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है जो जमीन की रजिस्ट्री, म्यूटेशन और अन्य जरूरी राजस्व कार्यों के लिए तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। हड़ताल के कारण राज्य की तमाम तहसीलों में सन्नाटा पसरा हुआ है और दूर-दराज से आने वाले लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। प्रॉपर्टी डीलर, किसान और आम नागरिक अपने जरूरी दस्तावेजों को सत्यापित कराने के लिए घंटों इंतजार करने के बाद वापस जाने को मजबूर हैं। राजस्व विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं जिससे सरकार को भी प्रतिदिन भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। स्थानीय प्रशासन स्थिति को संभालने के लिए लगातार वरिष्ठ कर्मचारियों और यूनियन नेताओं के साथ बातचीत के प्रयास कर रहा है ताकि किसी तरह से बीच का रास्ता निकाला जा सके। आने वाले दिनों में यदि इस गतिरोध का कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। कर्मचारी संघों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों और डिजिटल व्यवस्था में सुधार को लेकर उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया, तो वे अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करेंगे। वहीं दूसरी तरफ, सरकार भी जनता की परेशानियों को देखते हुए जल्द ही कोई कड़ा प्रशासनिक निर्णय ले सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें उच्च अधिकारियों और हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली आगामी बैठकों पर टिकी हुई हैं ताकि इस तालाबंदी को समाप्त किया जा सके।
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