लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं के कारण ट्रांसमिशन लाइनों पर पेड़ की डालें गिरने और शॉर्ट सर्किट होने की तमाम घटनाएं सामने आई हैं। बिजली बोर्ड के नियंत्रण कक्षों में शिकायतों का अंबार लग गया है क्योंकि शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में पावर सप्लाई ग्रिड ट्रिप होने की समस्याएं बढ़ गई हैं। कई इलाकों में सब-स्टेशनों के अंदर पानी भर जाने के कारण एहतियात के तौर पर बिजली की आपूर्ति रोकनी पड़ी है। इस अचानक आए बिजली संकट के कारण औद्योगिक इकाइयों का कामकाज भी ठप पड़ गया है और छोटे कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मरम्मत कार्यों में आ रही बाधाएं और तकनीकी टीमों की कड़ी मेहनत बिजली विभाग के कर्मचारी और इंजीनियर प्रतिकूल मौसम के बावजूद युद्ध स्तर पर सुधार कार्यों में जुटे हुए हैं। हालांकि, जलभराव और कीचड़ भरे रास्तों के कारण फाल्ट वाली जगहों तक भारी मशीनरी और वाहनों को ले जाने में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। जनरेटर और बैकअप पावर स्रोतों पर निर्भरता बढ़ने से ईंधन की खपत भी काफी बढ़ गई है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और प्राथमिकता के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों में बिजली बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
भविष्य की तैयारियों पर मंथन और स्मार्ट ग्रिड तकनीक की आवश्यकता इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बिजली ढांचे के बार-बार फेल होने से यह स्पष्ट हो गया है कि मौजूदा ऊर्जा वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की सख्त जरूरत है। ऊर्जा विशेषज्ञों का सुझाव है कि भूमिगत केबलिंग नेटवर्क को विस्तार दिया जाए और मौसम रोधी सब-स्टेशनों का निर्माण किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके। स्मार्ट ग्रिड तकनीक को अपनाकर बिजली फाल्ट का तुरंत पता लगाने और उसे दूर करने की दिशा में भी काम तेजी से चल रहा है। सरकार इस दिशा में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित करने पर विचार कर रही है ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा हमेशा मजबूत बनी रहे।