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वरिष्ठ नागरिक दिवस: अनुभव की छांव में संवर रहा हिमाचल, 92 फीसदी से अधिक गांवों में रह रहे बुजुर्ग
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश से एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहां राज्य के 92 प्रतिशत से अधिक गांवों में बुजुर्गों का निवास है और उनका अनुभव समाज को संवार रहा है।
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Ankit Yadav
21 अग 2026, 18:49
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के पावन अवसर पर हिमाचल प्रदेश के बुजुर्गों की स्थिति और समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान को लेकर एक प्रेरणादायक और सकारात्मक परिदृश्य सामने आया है। पर्वतीय राज्यों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, यहां के ग्रामीण अंचलों में वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति एक मजबूत पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने को दर्शाती है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 92 फीसदी से अधिक गांवों में वरिष्ठ नागरिक निवास कर रहे हैं और अपने लंबे जीवन के अनुभवों से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आधुनिक दौर में जब संयुक्त परिवार की परंपरा लगातार कमजोर हो रही है, तब भी पहाड़ी संस्कृति ने अपने बुजुर्गों को संबल और सम्मान देने की इस परंपरा को सहेज कर रखा है।
अनुभव और परंपरा का अनूठा संगम
राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले ये बुजुर्ग केवल परिवार के संरक्षक ही नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक कृषि ज्ञान और लोक कथाओं के जीवित पुस्तकालय भी हैं। इन गांवों में वरिष्ठ नागरिकों की मौजूदगी नई पीढ़ी के लिए एक अनौपचारिक पाठशाला की तरह काम करती है, जहां युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं। हिमाचल प्रदेश की आबोहवा और यहां की शांत जीवनशैली बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए भी अनुकूल मानी जाती है। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और वृद्धावस्था से जुड़ी अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती रही है, जिसके समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि हमारे बुजुर्गों का जीवन अधिक सुगम और सुरक्षित बन सके।
कल्याणकारी योजनाएं और सामाजिक दायित्व
सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठन भी वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रहे हैं, जिनमें पेंशन योजनाओं से लेकर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रमुख हैं। विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस जैसे विशेष अवसर हमें यह आत्ममुग्ध होकर सोचने का मौका देते हैं कि हम अपने बुजुर्गों के जीवन को कितना और बेहतर बना सकते हैं। समाज का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह केवल विशेष दिनों पर ही नहीं, बल्कि वर्ष के हर दिन अपने वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और संवेदना का भाव रखे। हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में, जहां 92 प्रतिशत से अधिक गांवों में बुजुर्ग अपनी अमूल्य उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, यह आवश्यक है कि ग्रामीण विकास की हर योजना में उनकी प्राथमिकताओं और सेहत का विशेष ध्यान रखा जाए।
भविष्य की ओर देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि हम अपनी इन पुरानी और गौरवशाली पारिवारिक मान्यताओं को आधुनिक समय की चुनौतियों के बीच भी बचाकर रखें। बुजुर्गों का अनुभव ही किसी भी समाज की असली पूंजी होता है और जब यह पूंजी गांवों की छांव में सुरक्षित रहती है, तो पूरा प्रदेश विकास और संस्कारों के मामले में आगे बढ़ता है। विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर यह संकल्प लिया जाना चाहिए कि हिमाचल के हर गांव में रहने वाले बुजुर्ग को न केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, बल्कि उन्हें वह मान-सम्मान भी मिले जिसके वे अपने पूरे जीवन के समर्पण के बाद हकदार हैं।