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यातायात बहाली: पिथौरागढ़ में कूलागाड़ पुल से 75 घंटे बाद फिर शुरू हुआ वाहनों का आवागमन

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में कूलागाड़ पुल से करीब 75 घंटे के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू कर दी गई है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।

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Ankit Yadav
23 अग 2026, 11:26
यातायात बहाली: पिथौरागढ़ में कूलागाड़ पुल से 75 घंटे बाद फिर शुरू हुआ वाहनों का आवागमन
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था अक्सर मौसम और भौगोलिक चुनौतियों के कारण प्रभावित होती रहती है। इसी कड़ी में पिथौरागढ़ जिले के महत्वपूर्ण मार्गों में शुमार कूलागाड़ पुल लंबे समय से बंद होने के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ था। लगातार तीन दिनों से अधिक यानी लगभग पचहत्तर घंटों के कड़े संघर्ष और प्रशासनिक प्रयासों के बाद इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन सुचारू किया जा सका है। पुल के बंद रहने से स्थानीय निवासियों के अलावा क्षेत्र से गुजरने वाले पर्यटकों और मालवाहक वाहनों चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

यात्रियों और चालकों को मिली बड़ी राहत

पुल के फिर से खुलने से आवाजाही करने वाले लोगों ने गहरी राहत महसूस की है। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित महकमे ने स्थिति को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम किया। लगातार बंद पड़े रूट के कारण जरूरी सामानों की आपूर्ति और दैनिक कामकाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था, लेकिन अब यातायात बहाल होने से स्थिति पटरी पर लौटने लगी है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल आवाजाही की अनुमति दी है और स्थिति पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। पर्वतीय इलाकों में मानसून या अन्य प्राकृतिक कारणों से इस प्रकार की ढांचागत दिक्कतें अक्सर सामने आती रहती हैं, जिससे संपर्क मार्ग बाधित हो जाते हैं। कूलागाड़ पुल की यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और पुल नेटवर्क की मजबूती कितनी जरूरी है। जब भी इस तरह के मार्ग लंबे समय के लिए बंद होते हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्थाओं के अभाव में आम जनता की मुश्किलें काफी बढ़ जाती हैं। इस बार भी क्षेत्रवासियों को लगभग तीन दिनों तक भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से तुरंत निपटने और सड़कों को कम से कम समय में दुरुस्त करने के लिए विभागीय स्तर पर और अधिक सतर्कता बरती जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि ऐसे संवेदनशील पुलों और रास्तों की नियमित मरम्मत और निगरानी की जाए ताकि बार-बार यातायात बाधित होने की नौबत न आए। फिलहाल कूलागाड़ पुल पर वाहनों का संचालन सामान्य रूप से शुरू होने से पूरे क्षेत्र में जनजीवन एक बार फिर से अपनी रफ्तार पकड़ने लगा है।
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