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राजनीति

युवाओं का अनुभव: दस दिवसीय सत्र में 1908 छात्र-छात्राओं ने देखी विधान सभा की कार्यवाही

प्रदेश भर से आए युवाओं ने विधायी प्रक्रियाओं को करीब से समझा, विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप पठानियां ने दी जानकारी।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 15:26
युवाओं का अनुभव: दस दिवसीय सत्र में 1908 छात्र-छात्राओं ने देखी विधान सभा की कार्यवाही
लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को युवा पीढ़ी के करीब लाने और उनमें संसदीय संस्कृति की समझ विकसित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली है। हाल ही में संपन्न हुए दस दिवसीय विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों से भारी संख्या में छात्र-छात्राओं ने पहुंचकर सदन की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस विशेष शैक्षणिक और व्यावहारिक दौरे के माध्यम से युवाओं को देश की कानून बनाने की प्रक्रिया और विधायी चर्चाओं को नजदीक से देखने का दुर्लभ अवसर मिला, जिससे उनकी राजनीतिक और सामाजिक समझ में निश्चित रूप से वृद्धि हुई है। विधान सभा के अध्यक्ष कुलदीप पठानियां ने इस अभूतपूर्व छात्र सहभागिता के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि सत्र की पूरी अवधि के दौरान कुल 1908 विद्यार्थियों ने सदन की दीर्घा में बैठकर विधायी कामकाज को परखा। इन छात्र-छात्राओं में विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के युवा शामिल थे, जो अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में विशेष रूप से विधानसभा पहुंचे थे। अध्यक्ष महोदय ने इस बात पर जोर दिया कि जब युवा देश की सबसे बड़ी पंचायत के कामकाज को खुद अपनी आँखों से देखते हैं, तो उनके भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों और नियमों के प्रति सम्मान और गहरी समझ पैदा होती है।

लोकतंत्र की पाठशाला

संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली केवलता किताबों या कक्षाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि व्यावहारिक अनुभव के जरिए इसे छात्रों के जेहन में उतारना बेहद आवश्यक है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए विधानसभा सचिवालय द्वारा इन छात्र समूहों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, ताकि उन्हें सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सदन के भीतर चल रही बहस, विभिन्न मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाले तर्कों तथा विधेयकों पर होने वाली चर्चाओं ने इन युवाओं को यह सिखाया कि किस प्रकार से एक जिम्मेदार लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और चर्चा के माध्यम से नीतियां बनाई जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दौरों से युवाओं में नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं और वे भविष्य के जिम्मेदार नागरिक के रूप में उभरते हैं। जब छात्र अपने जनप्रतिनिधियों को सदन के भीतर जनता की समस्याओं पर मुखर होकर बोलते हुए देखते हैं, तो उनका लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा और अधिक मजबूत होता है। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानियां द्वारा प्रस्तुत किए गए इन आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि आज की युवा पीढ़ी राजनीति और देश के शासन संचालन को लेकर कितनी उत्सुक और जागरूक है। आगामी समय में भी इस प्रकार के शैक्षणिक दौरों को निरंतर जारी रखने की योजना पर विचार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को देश और प्रदेश की विधायी प्रणाली से जोड़ा जा सके। इस दस दिवसीय सत्र के सफल आयोजन और भारी छात्र उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारे देश के युवा लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने में गहरी रुचि रखते हैं और वे विधायी कामकाज को सीखने के लिए पूरी तरह से तत्पर हैं।
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