मुकाबले पर बारिश का संकट और नियम क्रिकेट के मैदान पर जब भी मौसम खराब होता है और घनघोर बारिश के कारण खेल सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ पाता है, तब तमाम खेल प्रेमियों की निगाहें सीधे तौर पर टूर्नामेंट की आधिकारीक नियम पुस्तिका और खेल के मैदान पर मौजूद अंपायरों के फैसलों पर टिक जाती हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जाने वाले इस बेहद अहम और रोमांचक मुकाबले से पहले मौसम विभाग की भविष्यवाणियों ने आयोजकों और प्रशंसकों की धड़कनों को काफी बढ़ा दिया है। यदि आसमान से बरसने वाला पानी खेल शुरू होने में रुकावट बनता है या फिर बीच में ही खेल को पूरी तरह से रोकने पर मजबूर करता है, तो दोनों ही टीमों के खेमे में चिंता की लहर दौड़ना बिल्कुल स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में मैदान के ड्रेनेज सिस्टम और सुपर सोपर की भूमिका बेहद अहम हो जाती है ताकि कम से कम ओवरों का एक छोटा मुकाबला ही सही, लेकिन नतीजा निकाला जा सके। यदि एक तय समय सीमा के बाद भी गेंद मैदान पर फेंकी नहीं जा सकेगी, तो अंपायर मैच को रद्द करने का कड़ा फैसला लेने के लिए पूरी तरह से बाध्य होंगे।
अंक तालिका और नेट रन रेट का गणित किसी भी बड़े टूर्नामेंट के सुपर चरण या नॉकआउट दौर से पहले इस प्रकार के मुकाबले का रद्द होना सीधे तौर पर टीमों के भविष्य का निर्धारण करने वाला साबित होता है। यदि भारत और अफगानिस्तान का यह निर्धारित मैच बारिश के कारण पूरी तरह से धुल जाता है और दोनों पारियों का खेल संभव नहीं हो पाता है, तो खेल के स्थापित नियमों के मुताबिक दोनों प्रतिस्पर्धी टीमों के बीच एक-एक अंक बराबर रूप से बांट दिया जाएगा। इस तरह के समीकरण में यह देखना बेहद दिलचस्प हो जाता है कि उस विशिष्ट समय पर अंक तालिका में दोनों टीमों की मौजूदा स्थिति क्या है और उनका नेट रन रेट किस पायदान पर खड़ा है। क्रिकेट के खेल में नेट रन रेट एक ऐसा पैमाना है जो मामूली अंतर से भी किसी मजबूत टीम को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा सकता है या फिर किसी दूसरी टीम को बिना खेले ही आगे बढ़ने का स्वर्णिम अवसर प्रदान कर सकता है। खेल विशेषज्ञों और सांख्यिकीविदों का मानना है कि इस तरह की अप्रत्याशित बाधाओं से निपटने के लिए पहले से ही मजबूत रन रेट बनाकर चलना किसी भी टीम के लिए बेहद सुरक्षात्मक साबित होता है, जिससे बाद में किसी भी प्रकार की अनहोनी से आसानी से बचा जा सके।
सेमीफाइनल की दौड़ पर पड़ने वाला असर टूर्नामेंट के इस चरण में जरा सी भी चूक या मौसम की बेरुखी सीधे तौर पर सेमीफाइनल की टिकट हासिल करने के सपनों को चकनाचूर कर सकती है। यदि खराब मौसम की वजह से खेल नहीं हो पाता है और अंक साझा करने की नौबत आती है, तो भारत और अफगानिस्तान दोनों को ही अपने अगले या पिछले मैचों के परिणामों पर बहुत अधिक निर्भर रहना पड़ेगा। टूर्नामेंट की प्रतिष्ठित ट्रॉफी पर कब्जा जमाने के लिए हर एक टीम साल भर कड़ी मेहनत करती है और इस तरह के व्यवधान खिलाड़ियों के मानसिक संतुलन पर भी गहरा असर डालते हैं। प्रबंधन और कोच इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि मैदान के बाहर के इन बाहरी कारकों पर किसी का नियंत्रण नहीं होता है, इसलिए केवल अपने हाथ में मौजूद प्रदर्शन पर ही पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आने वाले दिनों में यह मुकाबला खेल जगत के गलियारों में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना रहेगा और हर कोई यही प्रार्थना करेगा कि बादलों की यह लुकाछिपी जल्द से जल्द खत्म हो तथा खेल प्रेमियों को बल्ले और गेंद के बीच एक रोमांचक जंग देखने का पूरा मौका मिले।