तीरंदाजी और बैडमिंटन में भारत का दबदबा
एशियाई पैरा खेलों के आयोजन का पांचवां दिन भारत के लिए पदकों की बारिश लेकर आया। भारतीय दल ने इस प्रतियोगिता में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है और आज के दिन कुल तीन स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। पुरुषों की रिकर्व डबल्स तीरंदाजी स्पर्धा में हरविंदर सिंह और विजय सुंडी की जोड़ी ने सटीक निशाना लगाते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक पर अपना कब्जा जमाया। इसी तरह बैडमिंटन कोर्ट पर भी भारतीय शटलरों का जलवा बरकरार रहा। पुरुष सिंगल्स की एस.एल.-3 श्रेणी में नितेश कुमार ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही बैडमिंटन की एस.एल.-4 स्पर्धा में नवीन शिवकुमार ने स्वर्ण पदक अपने नाम करके भारत की गौरवशाली उपलब्धियों में एक और बड़ा नाम जोड़ दिया। आज के दिन ये तीन स्वर्ण पदक भारत की पदक तालिका को और अधिक मजबूती प्रदान करने में सफल रहे हैं।
एथलेटिक्स और तीरंदाजी में चार रजत पदक
स्वर्ण पदकों के अलावा भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में चार रजत पदक भी हासिल किए। पैरा एथलेटिक्स में प्रमोद ने पुरुषों की 1500 मीटर टी-46 रेस में कड़ी चुनौती पेश करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। वहीं महिलाओं की टी-47 लंबी कूद स्पर्धा में निमिषा चक्कुंगलपरमबिल ने शानदार प्रदर्शन किया और 5.37 मीटर की दूरी तक छलांग लगाकर रजत पदक को अपने नाम किया। इसके अतिरिक्त पैरा तीरंदाजी में भी भारत की झोली में पदक आया, जहां महिलाओं की रिकर्व डबल्स स्पर्धा में भावना और पूजा की जोड़ी ने फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि, खिताबी मुकाबले में इस भारतीय जोड़ी को चीन की टीम से 0-6 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। पैरा बैडमिंटन की महिलाओं की सिंगल्स एस.यू.-5 स्पर्धा में थुलासिमथी मुरुगेसन ने रजत पदक जीता। उन्हें फाइनल मुकाबले में चीन की खिलाड़ी क्यूशिया यांग के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा और वे स्वर्ण से चूक गईं।
खिलाड़ियों का सफर और भविष्य की संभावनाएं
भारतीय खिलाड़ियों ने आज के मुकाबलों में जिस प्रकार की प्रतिबद्धता दिखाई है, वह आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकेत है। एथलेटिक्स ट्रैक पर प्रमोद का पदक जीतना काफी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने इससे पहले तीन वर्ष पूर्व हांगझोऊ में भी रजत पदक हासिल किया था। यह निरंतरता दर्शाती है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और पुराने अनुभवों से सीख रहे हैं। हालांकि कुछ मुकाबलों में चीन जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ भारतीय खिलाड़ियों को हार झेलनी पड़ी, लेकिन पदक के करीब पहुंचना ही उनकी कठिन मेहनत और तैयारी का सबूत है। चीन की खिलाड़ियों के खिलाफ मिली यह हार भविष्य में और भी अधिक कड़ा अभ्यास करने की प्रेरणा देगी। आज के इन सभी पदकों के साथ भारत की समग्र स्थिति एशियाई पैरा खेलों में काफी अच्छी नजर आ रही है, और आने वाले दिनों में देश के और अधिक पदक जीतने की पूरी संभावना बनी हुई है।