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हॉकी में अनोखा इतिहास: हरियाणा से मां-बेटे की जोड़ी ने खेला वर्ल्ड कप, प्रीतम सिवाच का जुनून बना मिसाल

हरियाणा के खेल जगत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी अनूठी छाप छोड़ी है। राज्य में एक ऐसा अद्भुत मामला सामने आया है जहाँ हॉकी वर्ल्ड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में मां और बेटे की जोड़ी ने भाग लेकर इतिहास रच दिया है। इस सफलता के पीछे खेल के प्रति अटूट समर्पण और विशेष रूप से जानी-मानी हस्ती प्रीतम सिवाच के मार्गदर्शन का बड़ा हाथ रहा है, जिन्होंने खिलाड़ियों के विकास के लिए एक बेहतरीन मंच तैयार किया है।

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Ankit Yadav
22 अग 2026, 13:28
हॉकी में अनोखा इतिहास: हरियाणा से मां-बेटे की जोड़ी ने खेला वर्ल्ड कप, प्रीतम सिवाच का जुनून बना मिसाल
भारतीय खेल इतिहास में कई जांबाज खिलाड़ियों के नाम दर्ज हैं, लेकिन कुछ उपलब्धियां इतनी दुर्लभ होती हैं कि वे सदियों तक याद रखी जाती हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा के खेल परिदृश्य में एक ऐसा अनूठा वाकया देखने को मिला है जिसने सबको हैरान कर दिया है। हॉकी वर्ल्ड कप के इस बड़े सफर में एक मां और उनके बेटे ने शिरकत की, जो अपने आप में एक असाधारण बात है। आमतौर पर खेल के मैदान में भाई-बहन या पिता-पुत्र की जोड़ियां देखने को मिलती हैं, लेकिन मां-बेटे का एक ही स्तर पर विश्व कप जैसे आयोजन का हिस्सा बनना भारतीय खेलों में अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में आता है।

प्रीतम सिवाच का योगदान और संघर्ष

इस शानदार मुकाम तक पहुँचने के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत और समर्पण छिपा है। इस पूरी पृष्ठभूमि को तैयार करने में कोच और खेल हस्ती प्रीतम सिवाच के जुनून की अह्म भूमिका रही है। उन्होंने जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तराशने का जो बीड़ा उठाया था, उसी का नतीजा है कि आज हरियाणा के युवा और अनुभवी खिलाड़ी अंतराष्ट्रीय पटल पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रीतम सिवाच ने अपने कोचिंग करियर के दौरान न केवल अनुशासन पर जोर दिया, बल्कि खेल के प्रति ऐसा माहौल बनाया जहाँ हर प्रतिभा को आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके। राज्य के युवाओं में खेलों के प्रति रुझान बढ़ाने में इस तरह की सफलताएं उत्प्रेरक का काम करती हैं। जब एक ही परिवार से दो पीढ़ियों के सदस्य विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं, तो यह आसपास के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और अटूट संकल्प शक्ति मिल जाए, तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

भविष्य की संभावनाएं और खेल संस्कृति

हरियाणा सरकार और स्थानीय खेल अकादमियों के प्रयासों से राज्य में लगातार खेल का बुनियादी ढांचा मजबूत हो रहा है। ऐसे दौर में मां-बेटे की इस जोड़ी का हॉकी वर्ल्ड कप खेलना इस बात का प्रमाण है कि यहां की माटी में खेल की संस्कृति किस गहराई तक रची-बसी है। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी को हॉकी जैसे राष्ट्रीय खेल की ओर आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। आगामी टूर्नामेंट्स को देखते हुए इस सफलता से पूरे राज्य के खेल समुदाय में उत्साह की लहर दौड़ गई है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यहां से और भी कई उभरते सितारे निकलेंगे जो वैश्विक मंच पर भारत का तिरंगा ऊंचा लहराएंगे। प्रीतम सिवाच के दिखाए रास्ते पर चलकर कई अन्य युवा भी अपने सपनों को पंख देने के लिए जी-जान से मेहनत कर रहे हैं।
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